भारतीय छात्रों ने जीता अर्थ प्राइज, चुंबक से माइक्रोप्लास्टिक निकालने का तरीका खोजा
भारत 16 वर्षीय के विद्यार्थी विवान छवाछरिया, अरियाना अग्रवाल और अव्याना मेहता द अर्थ प्राइज 2026 जीतने वाली पहली भारतीय टीम बन गए हैं। मई में उनके प्रोजेक्ट 'प्लास-स्टिक' को विजेता घोषित किया गया। यह प्रोजेक्ट इमली के बचे हुए बीजों से एक ऐसा बायोडिग्रेडेबल पाउडर बनाता है, जो पानी से माइक्रोप्लास्टिक के कणों को हटाता है।
यह किफायती है, इस्तेमाल में आसान है और इसे लगभग 23,000 लोगों ने विजेता के तौर पर चुना है।
ऐसे हटाता है माइक्रोप्लास्टिक कचरा
प्लास-स्टिक पानी में मिलकर माइक्रोप्लास्टिक के कणों को आपस में चिपका देता है, जिससे उन्हें एक साधारण चुंबक की मदद से आसानी से बाहर निकाला जा सकता है।
इसके लिए किसी भी फैंसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी के शोधकर्ताओं की मदद से इसे ऐसे इलाकों के लिए तैयार किया गया है, जहां हाई-टेक फिल्टर जैसी सुविधाएं नहीं होतीं।
अभी यह बाजार में नहीं आया है, लेकिन प्लास-स्टिक प्लास्टिक प्रदूषण साफ करने और कृषि कचरे को कम करने दोनों में भूमिका निभा सकता है।