AI के कारण अचानक बिजली की मांग में उछाल से उपकरण हो रहे खराब
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डाटा सेंटर्स में बिजली की खपत अचानक इतनी बढ़ जाती है कि वह उनकी तय क्षमता से 50 फीसदी तक ऊपर चली जाती है।
यह दिक्कत खासकर तब आती है, जब नए AI मॉडल्स को प्रशिक्षित किया जाता है। इस तेज उछाल की वजह से बैटरियां, टर्बाइन और कूलिंग सिस्टम खराब हो रहे हैं।
इससे बिजली प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है और साथ ही कंपनियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मांग में उतार-चढ़ाव से बिजली गुल होने का खतरा
कुछ AI सेंटर्स अब इतनी बिजली खर्च कर रहे हैं, जितनी बोस्टन जैसे एक पूरे शहर को चाहिए होती है। वहां बिजली की खपत कुछ ही सेकेंड में बहुत तेजी से ऊपर-नीचे होती रहती है।
मेनस्प्रिंग एनर्जी की संस्थापक और अध्यक्ष शैनन मिलर बताती हैं कि इन उतार-चढ़ाव के चलते कई बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ा दिया गया है। टेक्सास के एक बड़े ऊर्जा सेंटर को अब 2028 तक के लिए टाल दिया गया है। इस वजह से बिजली गुल होने का खतरा भी बढ़ गया है, क्योंकि ज्यादातर पावर ग्रिड इस तरह की अचानक बदलने वाली मांग को झेलने के लिए बनाए ही नहीं गए थे।
हालांकि, कुछ सुधारों पर काम चल रहा है, लेकिन उद्योग को अभी भी बहुत लंबा सफर तय करना बाकी है, ताकि हालात पूरी तरह स्थिर हो सकें।