न्यूरालिंक चिप के साथ नोलैंड आर्बॉ के 100 दिन पूरे, अनुभव किया साझा
क्या है खबर?
एलन मस्क की ब्रेन चिप बनाने वाली कंपनी न्यूरालिंक के पहले मानव मरीज नोलैंड आर्बॉ ने इस डिवाइस के साथ 100 दिन पूरे कर लिए हैं। उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि यह तकनीक उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लेकर आई है। आर्बॉ 2016 में एक हादसे के बाद कंधों से नीचे पैरालाइज्ड हैं। अब यह चिप उन्हें बिना हाथों के टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने में मदद कर रही है।
सुधार
सर्जरी के बाद जल्दी हुआ सुधार
आर्बॉ ने बताया कि सर्जरी के दौरान रोबोटिक सिस्टम से उनके दिमाग में पतले थ्रेड्स लगाए गए। यह प्रक्रिया आसान रही और कुछ ही दिनों में वे ठीक महसूस करने लगे। एक हफ्ते के अंदर घाव भर गया और सिस्टम एक्टिव हो गया। इसके बाद उन्होंने खुद को पहले से ज्यादा मानसिक रूप से सक्रिय महसूस किया। उन्होंने इस पूरे अनुभव को साइंस फिक्शन जैसा बताया, जो अब उनकी रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है।
संभव
सोच से कंप्यूटर चलाना हुआ संभव
इम्प्लांट एक्टिव होने के बाद आर्बॉ ने अपने दिमाग से कंप्यूटर को कंट्रोल करना सीख लिया। शुरुआत में उन्हें अभ्यास करना पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे कर्सर चलाना, क्लिक करना और टाइप करना आसान हो गया। उन्होंने इस सिस्टम को अपने मैकबुक से जोड़ा और अब वे बिना हाथ लगाए उसे इस्तेमाल कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब वे सिर्फ सोचकर ही डिवाइस को पूरी तरह नियंत्रित कर लेते हैं।
उम्मीद
गेमिंग और भविष्य की नई उम्मीद
कुछ समय बाद आर्बॉ ने इस तकनीक से गेम खेलना भी शुरू कर दिया और अब वे बिना हाथों के गेमिंग कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 100 दिन बाद अब वे इस तकनीक के बिना अपने जिंदगी की कल्पना नहीं कर सकते। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में पैरालिसिस वाले लोगों के लिए नई उम्मीद बन सकती है और उन्हें ज्यादा स्वतंत्र जीवन जीने में मदद कर सकती है।