नासा ने शुरू की नई प्रतियोगिता, विजेताओं को मिलेंगे 5 लाख डॉलर का इनाम
क्या है खबर?
नासा ने 19 अगस्त, 2026 को एक नया प्राइज कॉन्टेस्ट शुरू किया है। इसमें ऐसे आविष्कारों की तलाश है, जो पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद बेहद पतली हवा को सस्ते तरीके से माप सकें। इसी हवा के कारण सैटेलाइट्स की गति और कक्षा पर असर पड़ता है। ऑर्बिटल क्लैरिटी चैलेंज नाम का यह मुकाबला नासा के टेकलीप प्राइज प्रोग्राम का हिस्सा है। इसमें जीतने वाली टीमों को पुरस्कार के साथ अंतरिक्ष में तकनीक आजमाने का मौका मिलेगा।
चुनौती
अंतरिक्ष में मौजूद हवा बनती है चुनौती
इस चुनौती में आविष्कारकों को ऐसे छोटे उपकरण बनाने होंगे, जो निचली कक्षा में हवा का घनत्व, दबाव या खिंचाव माप सकें।
पृथ्वी से काफी ऊपर थर्मोस्फीयर में हवा बहुत कम है, लेकिन वह सैटेलाइट्स पर लगातार असर डालती है। सूर्य की गतिविधि बढ़ने पर ऊपरी वायुमंडल गर्म होकर फैलता है और सैटेलाइट्स को ज्यादा खिंचाव महसूस होता है।
इससे उनकी कक्षा बदल सकती है और भविष्य की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।
कीमत
कम कीमत वाले उपकरण चाहता है नासा
नासा इस बार महंगे वैज्ञानिक उपकरणों के बजाय कम लागत वाले और आसानी से इस्तेमाल होने वाले सेंसर चाहता है।
इन उपकरणों को बड़ी संख्या में बनाया जा सके और सामान्य व्यावसायिक अंतरिक्ष यानों पर लगाया जा सके, यही चुनौती का मुख्य लक्ष्य है। ज्यादा उपग्रहों पर ऐसे सेंसर लगाए जाने से वैज्ञानिकों को ऊपरी वायुमंडल की लगातार जानकारी मिल सकेगी।
इससे कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स की स्थिति समझने और उनकी निगरानी करने में भी मदद मिलेगी।
इनाम
चार विजेताओं को मिलेगा बड़ा इनाम
ऑर्बिटल क्लैरिटी चैलेंज को तीन चरणों में पूरा किया जाएगा और अधिकतम चार विजेता टीमें चुनी जाएंगी।
कुल 5 लाख डॉलर (करीब 5 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि इन टीमों के बीच बांटी जाएगी। विजेताओं को अपनी तकनीक का अंतरिक्ष में परीक्षण करने के लिए मुफ्त टेस्ट उड़ान भी मिलेगी।
नासा ने पूरी चुनौती के लिए करीब 12 महीने का समय रखा है। बेहतर आंकड़े मिलने से सैटेलाइट संचालकों को कक्षा सुधारने में मदद मिल सकती है।