सौर तूफान के कारण ISRO ने भारत के 50 से अधिक सैटेलाइट्स की निगरानी बढ़ाई
क्या है खबर?
सूर्य के भीतर होने वाली गतिविधियों में बीते कुछ समय में बढ़त देखने को मिली है, जिससे अंतरिक्ष एजेंसियां काफी सतर्क हो गई हैं। तेज सोलर फ्लेयर और ऊर्जा विस्फोटों के कारण रेडियो ब्लैकआउट और सैटेलाइट सिस्टम में बाधा की आशंका जताई जा रही है। इसी वजह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने 50 से अधिक सक्रिय सैटेलाइट्स की लगातार निगरानी शुरू कर दी है, ताकि संचार और नेविगेशन सेवाओं पर असर न पड़े।
समस्या
क्या होती है सौर तूफान की समस्या?
सौर तूफान तब बनते हैं जब सूर्य अचानक बड़ी मात्रा में ऊर्जा और रेडिएशन छोड़ता है। इसका सीधा असर धरती के आयनमंडल पर पड़ता है, जो रेडियो संचार के लिए बेहद जरूरी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसे समय में रेडियो सिग्नल कमजोर हो सकते हैं और GPS जैसी सेवाओं में गड़बड़ी आ सकती है। ISRO ने पहले ही ग्राउंड स्टेशनों को अलर्ट कर दिया है और आपात व्यवस्था तैयार रखी गई है।
गतिविधि
क्यों बढ़ी है सूर्य की गतिविधि?
वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य इस समय अपने सोलर मैक्सिमम चरण में है, जिसमें गतिविधियां स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती हैं। सूर्य पर मौजूद सनस्पॉट ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं और अचानक तेज फ्लेयर निकलते हैं। हाल ही में एक बेहद शक्तिशाली फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसे इस साल का सबसे तेज माना गया। भारतीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पहले से इस गतिविधि पर नजर रखे हुए थे और समय रहते चेतावनी जारी की गई।
असर
धरती और तकनीक पर क्या असर?
तेज सोलर फ्लेयर से निकलने वाला रेडिएशन इंसानों के लिए सीधे खतरे का कारण नहीं बनता, लेकिन तकनीकी सिस्टम पर इसका असर गंभीर हो सकता है। हाई फ्रीक्वेंसी रेडियो, सैटेलाइट उपकरण, विमानन सेवाएं और बिजली ग्रिड प्रभावित हो सकते हैं। किसी ऊंचे अक्षांश वाले इलाकों में इसका जोखिम सामान्य जगह से ज्यादा रहता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि फिलहाल कोई बड़ा खतरा सामने नहीं आया है, लेकिन सतर्कता जरूरी है।
तैयारी
भारत की तैयारी और आगे की योजना
भारत का आदित्य-L1 मिशन सूर्य की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। यह मिशन पहले से चेतावनी देकर सैटेलाइट और संचार नेटवर्क को सुरक्षित रखने में मदद करता है। इसके अलावा, लद्दाख में बड़े सोलर टेलीस्कोप की योजना पर भी काम चल रहा है। वैज्ञानिक मानते हैं कि भविष्य में तकनीक पर निर्भरता बढ़ने के साथ सूर्य के व्यवहार को समझना और निगरानी रखना और भी जरूरी हो जाएगा।