काम के बोझ के नीचे तो नहीं दब गए आप, AI बताएगा कैसे करें समय प्रबंधन?
क्या है खबर?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने समय को अच्छे से मैनेज करना आसान बना दिया है। यह खुद शेड्यूल तैयार करता है और कामों को उनकी अहमियत के हिसाब से सेट करता है और काम पर पूरा ध्यान लगाने वाले समय को सुरक्षित रखता है। ऐसा करके आप वर्किंग वीक का 40 फीसदी तक समय महत्वपूर्ण कामों के लिए बचा पाते हैं। आइये जानते हैं समय प्रबंधन में AI की सहायता कैसे ली जा सकती है।
#1
शेड्यूलिंग को ऑटोमैटिक बनाना
रीक्लेम डॉट AI जैसे टूल आपकी व्यक्तिगत दिनचर्या और रोजमर्रा के कामों के बीच सही तालमेल बिठाते हैं। ये आपके कैलेंडर में फोकस वाले काम, आपकी आदतें (वर्कआउट या खाना) और ब्रेक के लिए खुद समय ब्लॉक कर देते हैं। साथ ही, ये गूगल और आउटलुक कैलेंडर के साथ भी जुड़ जाते हैं। जब कोई नई मीटिंग आती है तो ये टूल आपके बाकी कामों को अपने आप फिर से शेड्यूल कर देते हैं, ताकि आपकी प्राथमिकताएं बनी रहें।
#2
ऑटो-शेड्यूलिंग के बेहतरीन समाधान
मोशन एक ऐसा ऑटो-शेड्यूलर है, जो आपके सभी कामों- टास्क, प्रोजेक्ट और मीटिंग्स को एक साथ मैनेज करता है। यह डेडलाइन, कामों की अहमियत और उनकी समय अवधि के हिसाब से टाइम ब्लॉक बनाता है। अगर, कभी कामों में बदलाव होता है तो यह रियल टाइम में कैलेंडर को अपने आप फिर सेट कर देता है। यह आपके काम के घंटों का भी ध्यान रखता है और तनाव से बचने के लिए बीच-बीच में खाली समय (बफर) भी जोड़ता है।
#3
अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर कामों को प्राथमिकता देना
वे लोग, जो एक साथ कई ऐप पर काम करते हैं, उनके लिए अकिफ्लो ईमेल प्लेटफॉर्म (स्लैक) और प्रोजेक्ट टूल से सारे टास्क को एक जगह इकट्ठा कर लेता है। यह AI का इस्तेमाल करके कैलेंडर में खाली समय और आवश्यक काम के आधार पर इन टास्क को प्राथमिकता देता है। साथ ही बार-बार ऐप बदलने की जरूरत कम करता है। यह डेडलाइन को अपने आप शेड्यूल करता है और जरूरत पड़ने पर उन्हें फिर से तय भी करता है।
#4
फोकस वाले समय को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखना
क्लॉकवाइज आपके और आपकी टीम के कैलेंडर को AI-आधारित रीशेड्यूलिंग क्षमता से बेहतर बनाता है। यह फोकस वाले समय को सुरक्षित रखता है, जिसमें यह कम अहमियत वाली मीटिंग्स को नेचुरल लैंग्वेज कमांड से तुरंत एडजस्ट कर देता है। फ्लोसेवी खाली पड़े समय को एल्गोरिदम की मदद से कामों से भर देता है। रुकावट आने पर उसके हिसाब से बदल जाता है। यह आपको कलर कोडिंग के जरिए बताता है कि कहीं जरूरत से ज्यादा काम तो नहीं ले रहे।