IIT की टीम ने चंद्रमा के पुराने रहस्य किए उजागर, चंद्रयान-4 मिशन में होंगे मददगार
क्या है खबर?
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) खड़गपुर और भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने चंद्रमा के भीतर मौजूद संरचना के बारे में नए सुराग खोजे हैं। यह अध्ययन लौह और टाइटेनियम से भरपूर चट्टानों के एक दुर्लभ वर्ग पर केंद्रित है, जिन्हें इल्मेनाइट-युक्त संचय (IBC) के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि इनका निर्माण लगभग 4.3-4.4 अरब वर्ष पूर्व हुआ था। ये निष्कर्ष आगामी चंद्रयान-4 मिशन के दौरान लाए नमूनों की जांच से कई राज खोलने में मदद करेंगे।
प्रयोग
इन परिस्थितियों में किया परीक्षण
उनके प्रयोगों से पता चला कि तापमान के आधार पर ये प्राचीन चंद्र चट्टानें पिघलकर आंतरिक हिस्से में चली गईं और विभिन्न प्रकार के टाइटेनियम-समृद्ध लावा में परिवर्तित हो सकती हैं। इन प्राचीन सामग्रियों की जांच करने के लिए टीम ने प्रयोगशाला प्रयोगों में चंद्रमा के आंतरिक भाग की चरम स्थितियों को फिर से बनाया, जिसमें नमूनों को 3 गीगापास्कल तक के दबाव और 1,500 डिग्री से अधिक तापमान में रखा गया।
चंद्रयान-4
चंद्रयान-4 मिशन में होगा फायदा
प्रयोगों से पता चला कि IBC चट्टानें आंशिक रूप से पिघलकर आस-पास के मेंटल के साथ परस्पर क्रिया करती हैं, जिससे चंद्रमा की सतह पर पाए जाने वाले टाइटेनियम-समृद्ध बेसाल्ट के समान मैग्मा (पिघली हुई चट्टन) उत्पन्न होता है। शोधकर्ता प्रोफेसर सुजॉय घोष ने कहा, "ये परिणाम चंद्र नमूनों की उत्पत्ति और विकास को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक प्रायोगिक ढांचा प्रदान करते हैं।" उन्होंने भविष्य के नमूना-वापसी अभियानों से पहले इस कार्य के महत्व पर जोर दिया।