सरकार के नए ड्राफ्ट IT नियमों से इन्फ्लुएंसर्स और आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने नए IT नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है, जिससे ऑनलाइन न्यूज और करंट अफेयर्स कंटेंट को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इस प्रस्ताव का असर खासकर उन लोगों पर पड़ेगा, जो सोशल मीडिया पर न्यूज से जुड़े पोस्ट या वीडियो शेयर करते हैं। यह कदम कंटेंट पर निगरानी बढ़ाने और नियमों को स्पष्ट करने के लिए लाया गया है, लेकिन इसे लेकर कई जगह चिंता भी जताई जा रही है।
नियम
क्या हैं नए नियम और उनका दायरा?
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, अब सिर्फ प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि सामान्य यूजर्स द्वारा शेयर किए गए न्यूज कंटेंट भी नियम 14, 15 और 16 के तहत आएंगे। इसका मतलब है कि इन्फ्लुएंसर या आम लोग अगर न्यूज जैसी पोस्ट करते हैं, तो उनकी भी जांच हो सकती है। इसके साथ ही, सरकार की एडवाइजरी और निर्देशों का पालन करना प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य किया जा सकता है, जो पहले वैकल्पिक थे और इन्हें मानना जरूरी होगा।
इन्फ्लुएंसर्स
इन्फ्लुएंसर्स पर क्या असर पड़ेगा?
इन नियमों के लागू होने पर इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स पर सीधा असर पड़ेगा। अगर उनका कंटेंट नियमों के खिलाफ पाया जाता है, तो उन्हें चेतावनी दी जा सकती है, पोस्ट हटाने को कहा जा सकता है या माफी मांगने के लिए भी कहा जा सकता है। गंभीर मामलों में IT एक्ट के तहत ब्लॉकिंग ऑर्डर भी जारी किए जा सकते हैं, जिससे उनका कंटेंट या अकाउंट प्रभावित हो सकता है और पहुंच भी सीमित हो सकती है।
सामान्य यूजर्स
आम यूजर्स और प्लेटफॉर्म पर असर
यह बदलाव सिर्फ इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम यूजर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लागू होगा। इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी कंटेंट की जांच कर सकती है और कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। इससे प्लेटफॉर्म पर जिम्मेदारी बढ़ेगी और उन्हें यूजर्स के कंटेंट को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क रहना पड़ेगा, जिससे काम करने का तरीका भी बहुत बदल सकता है और नियमों का पालन सख्ती से करना होगा।
वजह
सरकार का पक्ष और नियम लाने की वजह
सरकार का कहना है कि यह कदम अलग-अलग मंत्रालयों के बीच जिम्मेदारी को स्पष्ट करने और फेक न्यूज जैसी समस्याओं से निपटने के लिए लाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया पर तेजी से बढ़ते न्यूज कंटेंट को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। इससे गलत जानकारी फैलने पर रोक लगेगी और सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बन सकेगा, जिससे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने में मदद मिलेगी और भरोसा भी बढ़ेगा।
प्रक्रिया
आलोचना और आगे की प्रक्रिया
कई विशेषज्ञ और संगठन इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे अभिव्यक्ति की आजादी पर असर पड़ सकता है और सरकार की ताकत बढ़ सकती है। कुछ का मानना है कि यह नियम कानूनी जांच में भी टिक नहीं पाएंगे। फिलहाल यह ड्राफ्ट 14 अप्रैल, 2026 तक सुझाव के लिए खुला है, जिसके बाद सरकार इसमें बदलाव करके अंतिम फैसला ले सकती है और आगे नई गाइडलाइन जारी कर सकती है।