नासा के आर्टेमिस II मिशन पर कितना हो रहा खर्च?
क्या है खबर?
नासा का आर्टेमिस II मिशन 50 से ज्यादा साल बाद इंसानों को फिर से चांद की ओर ले जाने वाला पहला क्रू मिशन है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री करीब 10 दिन तक अंतरिक्ष में रहेंगे और चांद के चारों ओर घूमकर वापस आएंगे। यह मिशन बड़े आर्टेमिस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भविष्य में इंसानों को चांद की सतह पर उतारना और आगे के अंतरिक्ष अभियानों के लिए तैयारी करना है।
खर्च
मिशन पर कितना हो रहा खर्च?
इस मिशन की अलग से सटीक लागत नहीं बताई गई है, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार हर आर्टेमिस लॉन्च पर 4 अरब डॉलर (लगभग 370 अरब रुपये) से ज्यादा खर्च हो रहा है। इसमें स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान शामिल हैं। पूरे आर्टेमिस प्रोग्राम पर 2025 तक करीब 93 अरब डॉलर (लगभग 8,700 अरब रुपये) खर्च होने का अनुमान है। यह लागत नई तकनीक, बड़े रॉकेट और डीप स्पेस सिस्टम तैयार करने की वजह से बढ़ रही है।
निवेशक
कौन उठा रहा है इतना बड़ा खर्च?
इस मिशन का ज्यादातर खर्च अमेरिका की सरकार उठा रही है, जो नासा को बजट के जरिए फंड देती है। यानी अमेरिकी टैक्स देने वाले लोग इस मिशन का खर्च उठा रहे हैं। इसके अलावा, बोइंग, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और लॉकहीड मार्टिन जैसी बड़ी कंपनियां रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट बना रही हैं। वहीं यूरोप, कनाडा और जापान जैसी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी तकनीकी सहयोग और कुछ संसाधनों के जरिए इसमें योगदान दे रही हैं।
वजह
क्यों इतना महंगा है यह मिशन?
आर्टेमिस II सिर्फ एक मिशन नहीं बल्कि भविष्य की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद चांद पर इंसानों की वापसी, वहां लंबे समय तक रहने की तैयारी और आगे चलकर मंगल मिशन की नींव रखना है। इसमें नई तकनीकों का विकास, कई बार डिजाइन में बदलाव और देरी जैसी वजहों से लागत बढ़ी है। यह मिशन अपोलो के बाद सबसे महंगे स्पेस प्रोग्राम में शामिल हो गया है और आने वाले समय में खर्च और बढ़ सकता है।