AI तकनीक से खेती में परागण कैसे बढ़ाया जा रहा है?
क्या है खबर?
आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) खेती के कई कामों को आसान बना रहा है। इनमें परागण का काम भी शामिल है, जो फसलों की पैदावार के लिए बेहद जरूरी होता है। पहले यह काम मुख्य रूप से मधुमक्खियों जैसे प्राकृतिक परागकणों या इंसानों की मेहनत पर निर्भर रहता था। अब नई AI तकनीकें इस प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बना रही हैं, जिससे खेती ज्यादा प्रभावी और टिकाऊ बनती जा रही है।
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प्राकृतिक परागकणों की कमी से बढ़ी जरूरत
दुनिया के कई हिस्सों में मधुमक्खियों और अन्य परागण करने वाले जीवों की संख्या लगातार कम हो रही है। इसका सीधा असर खेती और खाद्य उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में वैज्ञानिक AI आधारित तकनीकों को एक नए समाधान के रूप में देख रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से परागण का काम मशीनों और स्मार्ट सिस्टम के जरिए किया जा सकता है, जिससे फसलों की पैदावार और खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में मदद मिलती है।
#2
कंप्यूटर विजन से फूलों की पहचान
AI आधारित रोबोट कंप्यूटर विजन और डीप लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल करके आसानी से फूलों की पहचान कर सकते हैं। मास्क R-CNN और योलो v8 जैसी बहुत सी खास तकनीकें हैं, जो फूलों को पहचानने में काफी सटीक साबित हुई हैं। ये सिस्टम अलग-अलग तरह के फूलों को पहचानकर सही फूल पर ही परागण करते हैं। इससे परागकणों का सही उपयोग होता है और खेती में बेहतर नतीजे मिलते हैं।
#3
ड्रोन से भी किया जा रहा परागण
अब खेती में ड्रोन का इस्तेमाल परागण के लिए भी किया जा रहा है। ये ड्रोन नियंत्रित हवा की मदद से परागकणों को एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंचाते हैं। शोध में पाया गया है कि इस तकनीक से टमाटर और स्ट्रॉबेरी जैसी फसलों की पैदावार में करीब 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। ड्रोन फसलों की स्थिति पर भी नजर रखते हैं और सही समय पर जरूरी जानकारी देते हैं।
टिप 1
रोबोटिक सिस्टम से सटीक परागण
कुछ वैज्ञानिक ऐसे खास रोबोट भी विकसित कर रहे हैं, जो फूलों की दिशा पहचानकर सही तरीके से परागण कर सकते हैं। ये रोबोट कंप्यूटर विजन की मदद से फूल की स्थिति अच्छे से समझते हैं और फिर तने को हल्का हिलाकर परागकण गिराते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान सिस्टम हर फूल पर परागण की सफलता को भी रिकॉर्ड करता है। इससे खेती से जुड़ा महत्वपूर्ण डाटा भी इकट्ठा होता है।
टिप 2
स्मार्ट फार्मिंग के साथ AI का मेल
AI तकनीक को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेंसर और डाटा एनालिटिक्स के साथ जोड़कर स्मार्ट फार्मिंग को और भी मजबूत बनाया जा रहा है। इन सेंसर से खेत के तापमान, नमी और अन्य हालात की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर AI सिस्टम तय करता है कि परागण कब और कैसे करना चाहिए। इससे किसानों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिलती है और खेती की उत्पादकता भी बढ़ती है।