नासा का नया आर्टेमिस मिशन अपोलो से कैसे है अलग?
क्या है खबर?
नासा का नया आर्टेमिस मिशन फिर से इंसानों को चांद की ओर ले जाने की तैयारी में है और आर्टेमिस II को 1 अप्रैल को लॉन्च करने की योजना है। यह मिशन आधी सदी पहले हुए अपोलो प्रोग्राम के बाद सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। इस बार चार अंतरिक्ष यात्री चांद के पास जाकर सुरक्षित वापस लौटेंगे। यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें महिला, अश्वेत और कनाडाई अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं।
अंतर
अपोलो और आर्टेमिस में बड़ा अंतर
अपोलो मिशन में इंसान सीधे चांद पर उतरे थे, जबकि आर्टेमिस II में अंतरिक्ष यात्री सिर्फ चांद का चक्कर लगाकर वापस आएंगे और इस बार जोखिम को कम करने पर जोर दिया गया है। नासा ने इसे ज्यादा सुरक्षित माना है। अपोलो मिशन तेजी से पूरा हुआ था, लेकिन आर्टेमिस धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। नए मिशन में पहले टेस्ट और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा, ताकि भविष्य में चांद पर लंबे समय तक रहना संभव हो सके।
रॉकेट और तकनीक
नए रॉकेट और तकनीक का इस्तेमाल
आर्टेमिस मिशन में स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन कैप्सूल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो आधुनिक तकनीक से लैस है। यह रॉकेट अपोलो के सैटर्न V से अलग है और ज्यादा ताकतवर माना जाता है। हालांकि इसे अभी तक सिर्फ एक बार ही टेस्ट किया गया है और कुछ तकनीकी चुनौतियां भी सामने आई हैं। तकनीकी दिक्कतों के कारण इसमें देरी भी हुई है, लेकिन नासा इसे पूरी तरह तैयार करने में जुटा हुआ है।
योजना
चांद पर लौटने की नई योजना
आर्टेमिस मिशन का मकसद सिर्फ चांद तक पहुंचना नहीं, बल्कि वहां लंबे समय तक रहना भी है और इसके लिए नई योजनाएं बनाई जा रही हैं। भविष्य में अंतरिक्ष यात्री चांद पर कई दिन बिताएंगे और वहां से संसाधनों का उपयोग करने की योजना है। इसके लिए प्राइवेट कंपनियों की भी मदद ली जा रही है। स्पेस-X और ब्लू ओरिजन जैसे संस्थान इस मिशन में अहम भूमिका निभा रहे हैं और तेजी से काम कर रहे हैं।
प्रतिस्पर्धा
चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
अब अंतरिक्ष की दौड़ में चीन भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और उसने इस क्षेत्र में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उसने चांद के दूसरी तरफ अपने यान उतारे हैं और 2030 तक इंसानों को वहां भेजने की तैयारी कर रहा है। नासा भी इसी दिशा में काम कर रहा है और चांद के साउथ पोल को लक्ष्य बना रहा है। यहां पानी और ईंधन की संभावना है, जिससे भविष्य के मिशन आसान हो सकते हैं।