स्मार्टफोन से मेडिकल डिवाइस तक ब्लूटूथ, जानिए इसके दो प्रकार कैसे करते हैं काम
क्या है खबर?
ब्लूटूथ आज स्मार्टफोन, ईयरफोन, स्मार्टवॉच और दूसरे उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली आम वायरलेस तकनीक है। यह कम दूरी पर रेडियो तरंगों के जरिए डिवाइस को जोड़ती है, लेकिन ब्लूटूथ के सभी कनेक्शन एक जैसे नहीं होते। इसके मुख्य रूप से दो प्रकार हैं, ब्लूटूथ क्लासिक और ब्लूटूथ लो एनर्जी यानी LE। दोनों 2.4 गीगाहर्ट्ज बैंड पर काम करते हैं, लेकिन स्पीड, बिजली की खपत और इस्तेमाल के तरीके में काफी अंतर होता है।
क्लासिक
ब्लूटूथ क्लासिक कैसे करता है काम?
ब्लूटूथ क्लासिक लगातार डाटा भेजने वाले कामों के लिए बनाया गया है।
यह 2.4 गीगाहर्ट्ज बैंड में 79 चैनलों पर काम करता है और दो डिवाइस के बीच सीधा कनेक्शन बना सकता है। इसकी डाटा ट्रांसफर स्पीड करीब 3 एमबीपीएस तक पहुंच सकती है।
यह ज्यादा बिजली इस्तेमाल करता है, लेकिन लगातार ऑडियो और फाइल भेजने में बेहतर रहता है। इसलिए वायरलेस हेडफोन, स्पीकर और फोन कॉल जैसे कामों में इसका इस्तेमाल आम है।
LE
ब्लूटूथ LE कम बिजली में करता है काम
ब्लूटूथ LE का पूरा नाम लो एनर्जी है और इसे कम बिजली वाले उपकरणों के लिए बनाया गया है।
यह 2.4 गीगाहर्ट्ज बैंड में 40 चैनलों का इस्तेमाल करता है और लगातार डाटा भेजने के बजाय छोटे पैकेट भेजता है। इससे बैटरी ज्यादा समय तक चलती है। यह तकनीक स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड, डिजिटल चाबी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स उपकरणों में उपयोगी है।
कम ऊर्जा के कारण डिवाइस लंबे समय तक चलते हैं और बार-बार चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
डाटा तरीका
दोनों में डाटा भेजने का तरीका अलग
दोनों तकनीकों में अंतर उनके काम करने के तरीके से समझा जा सकता है।
क्लासिक कनेक्शन लगातार डाटा भेजता है, जबकि LE जरूरत पड़ने पर ही छोटी जानकारी भेजकर कम ऊर्जा की स्थिति में चला जाता है। LE कई उपकरणों के बीच मेष नेटवर्क बना सकता है।
इससे बड़े सिस्टम में बहुत सारे उपकरण आपस में जुड़ सकते हैं। इसके अलावा, LE में डिवाइस की दूरी और दिशा पहचानने जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
तकनीक
जरूरत के हिसाब से चुनें ब्लूटूथ तकनीक
ब्लूटूथ क्लासिक और LE का चुनाव जरूरत के हिसाब से किया जाता है।
लगातार और तेज ऑडियो या डाटा ट्रांसफर चाहिए, तो क्लासिक उपयोगी रहता है। कम बिजली में लंबे समय तक काम करना जरूरी है, तो LE बेहतर विकल्प है। LE का इस्तेमाल मेडिकल उपकरणों, औद्योगिक मशीनों और सेंसर नेटवर्क में होता है।
इसकी सुरक्षा सुविधाएं संवेदनशील डाटा वाले कनेक्शन के लिए मददगार हैं। इसी कारण दोनों तकनीकें अलग-अलग जरूरतों में महत्वपूर्ण हैं।