EPFL के वैज्ञानिकों ने ध्वनि तरंगों से चलाए छोटे ड्रोन
स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी EPFL के वैज्ञानिकों ने ऐसे छोटे ड्रोन बनाए हैं, जो मोटर से नहीं, बल्कि ध्वनि तरंगों से चलते हैं।
उन्होंने भौतिकी के एक खास सिद्धांत का इस्तेमाल किया, जिसे हेल्महोल्ट्ज रेजोनेंस कहते हैं। इस सिद्धांत के तहत, ये ड्रोन अपने अंदर के छोटे-छोटे खोखले हिस्सों में ध्वनि से पैदा होने वाले कंपन को धक्के (थ्रस्ट) में बदल देते हैं। इसी धक्के की वजह से ये ड्रोन बिना किसी मोटर, गियर या चुंबकीय पुरजों के हवा या पानी में आसानी से तैरते और आगे बढ़ते हैं।
नावों को भी ध्वनि की मदद से चलाया
माइक्रोब्स ने लगभग एक सेंटीमीटर लंबी मॉडल नावें भी बनाईं। इन नावों में 3 तक कैविटी (खाली जगह) थीं और हर एक अलग फ्रीक्वेंसी पर सेट थी। लाउडस्पीकर से आवाज की फ्रीक्वेंसी बदलकर शोधकर्ता अलग-अलग कैविटी को एक्टिवेट कर सकते थे। इससे नावें अलग-अलग दिशाओं में चल सकती थीं, रुकावटों के आस-पास घूम सकती थीं और अपने-आप प्रोग्राम किए गए रास्तों पर भी चल सकती थीं।
लैब के प्रमुख सेलमैन सकार का कहना है कि अगर, ऐसे कई ध्वनि-संवेदनशील खोखले हिस्सों को एक साथ इस्तेमाल किया जाए तो भविष्य में ऐसे रोबोट बनाए जा सकते हैं, जो सिर्फ ध्वनि सुनकर ही अपना आकार या चलने का तरीका बदल लेंगे।