टीवी रेटिंग नीति में किया गया बदलाव, दर्शकों की संख्या में आएगी पारदर्शिता
क्या है खबर?
सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने शनिवार को टेलीविजन दर्शकों की संख्या मापने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए। नई नीति के तहत रेटिंग एजेंसियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी, जिसमें नियमित ऑडिट और बेहतर डाटा सुरक्षा शामिल है। इस नीति में टीवी रेटिंग एजेंसियों के पंजीकरण, संचालन और निगरानी के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित किए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार, इस ढांचे का उद्देश्य दर्शकों की संख्या मापने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्वतंत्र और जवाबदेह बनाना है।
रेटिंग एजेंसी
टीवी रेटिंग एजेंसी बनने के ये होंगे नियम
अब वही कंपनी टीवी रेटिंग एजेंसी बन सकती है, जो कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत भारत में आधिकारिक रूप से पंजीकृत हो। उसको बताना होगा कि उसका मुख्य कार्य टीवी रेटिंग या बाजार अनुसंधान है और बोर्ड के कम से कम 50 फीसदी सदस्य स्वतंत्र निदेशक होने चाहिए और उनका टीवी चैनलों, विज्ञापन या विज्ञापन एजेंसियों से कोई संबंध नहीं होना चाहिए। टीवी रेटिंग एजेंसी बनने के लिए अब 5 करोड़ रुपये (पहले 20 करोड़ रुपये) की जरूरत है।
बाध्यता
कितने घरों का लेना होगा डाटा?
एजेंसियों को 18 महीनों के भीतर 80,000 घरों तक डाटा संग्रह का विस्तार करना होगा। चयनित घरों में केबल, DTH, OTT और कनेक्टेड टीवी पर सभी स्क्रीनों पर दर्शकों की संख्या मापी जानी चाहिए। एजेंसियों को अपनी रेटिंग गणना विधि को स्पष्ट रूप से समझाना होगा। टीवी चालू करते ही कोई चैनल अपने आप दिखाई देता (लैंडिंग पेज) है तो उन व्यूज को रेटिंग में शामिल नहीं किया जाएगा। चैनल प्रचार/मार्केटिंग के लिए लैंडिंग पेज का इस्तेमाल कर सकते हैं।