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ऐपल ने भारत में बढ़ाईं मैकबुक और आईपैड की कीमतें, जानें नई दरें
भारत में ऐपल ने बढ़ाईं कई प्रोडक्ट्स की कीमतें

ऐपल ने भारत में बढ़ाईं मैकबुक और आईपैड की कीमतें, जानें नई दरें

Jun 25, 2026
07:56 pm

क्या है खबर?

ऐपल ने आज (25 जून) भारत समेत पूरी दुनिया में अपने कई प्रोडक्ट्स की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने मैकबुक, मैक डेस्कटॉप, आईपैड, ऐपल टीवी और होमपॉड जैसे कई डिवाइस महंगे कर दिए हैं। हालांकि, फिलहाल आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी का कहना है कि बढ़ती मेमोरी और स्टोरेज लागत के कारण यह फैसला लिया गया है। नई कीमतें तुरंत लागू कर दी गई हैं।

मैकबुक

मैकबुक एयर और मैकबुक प्रो की नई कीमतें

512GB वाला मैकबुक एयर अब 1.19 लाख रुपये की जगह 1.37 लाख रुपये में मिलेगा। मैकबुक नियो की कीमत 59,900 रुपये से बढ़कर 69,900 रुपये हो गई है। M5 चिप वाला 13-इंच मैकबुक एयर 1.19 लाख रुपये से बढ़कर 1.49 लाख रुपये का हो गया। वहीं 15-इंच मैकबुक एयर 1.44 लाख रुपये से बढ़कर 1.79 लाख रुपये पहुंच गया। 14-इंच मैकबुक प्रो (M5, 16GB रैम) अब 1.69 लाख रुपये की जगह 2.39 लाख रुपये में मिलेगा।

आईपैड

आईपैड की कीमतों में भी बड़ा इजाफा

11-इंच आईपैड एयर (M4) की कीमत 64,900 रुपये से बढ़कर 89,900 रुपये हो गई है। वहीं 128GB आईपैड एयर की शुरुआती कीमत 64,900 रुपये से बढ़ाकर 83,900 रुपये कर दी गई। आईपैड प्रो (M5, 256GB) अब 99,990 रुपये की जगह 1.39 लाख रुपये में मिलेगा। कंपनी ने ऐपल टीवी और होमपॉड की कीमतें भी बढ़ाई हैं, हालांकि इन दोनों की नई भारतीय कीमतों का अलग से खुलासा नहीं किया गया है।

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वजह

क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें?

ऐपल का कहना है कि दुनियाभर में DRAM और NAND मेमोरी की कीमतें काफी तेजी से बढ़ रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) डाटा सेंटर की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इससे कंपोनेंट बनाने की लागत भी काफी बढ़ गई है। कंपनी के अनुसार, अब तक वह अतिरिक्त खर्च खुद उठा रही थी, लेकिन अब कई प्रोडक्ट्स की कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया है।

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आईफोन

आईफोन फिलहाल नहीं हुआ महंगा

ऐपल ने अभी आईफोन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मेमोरी चिप की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में आईफोन भी महंगा हो सकता है। कंपनी का कहना है कि वह ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन मौजूदा वैश्विक लागत को देखते हुए आगे और कीमतें बढ़ने की संभावना बनी हुई है।

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