AI के साथ बनाए रखें अच्छी आदतें, जानिए कौनसे टूल है इसमें मददगार
क्या है खबर?
भागदौड़ भरे जीवन में और प्रेरणा की कमी की वजह से अच्छी आदतें बनाए रखना मुश्किल होता है। आर्टिफिशियल इटेलिजेंस (AI) टूल्स इस समस्या का हल ढूंढने में एक नया रास्ता दिखा रहे हैं। ये टूल्स काम करने के तरीके को समझते हैं और उसके हिसाब से आपको ट्रैक करने, शेड्यूल बनाने और ऐसी खास जानकारी देने में मदद करते हैं, जो आपके लिए बनी है। आइये जानते हैं AI अच्छी आदतें बनाए रखने में कैसे मदद करता है।
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AI के साथ छोटी-छोटी आदतें बनाना
AI टूल्स बड़े लक्ष्यों को छोटे-छोटे और आसानी से पूरे किए जा सकने वाले कामों या माइक्रो-हैबिट्स में तोड़ने में बहुत माहिर हैं। इमरजेंट जैसे प्लेटफॉर्म ऐसे सिस्टम बनाते हैं, जो बर्ताव बनाने के सिद्धांतों पर काम करते हुए खुद को बदलते रहते हैं। ये सिस्टम संकेतों, रोजमर्रा की आदतों को समझकर यूजर्स को ऐसी आदतें बनाने में मदद करते हैं। इसी तरह, एटम्स ऐप एटॉमिक हैबिट्स के कॉन्सेप्ट को पहचान-आधारित माइक्रो-हैबिट्स के जरिए लागू करता है।
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लगातार बने रहने के लिए शेड्यूलिंग टूल्स
रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में AI शेड्यूलिंग टूल्स आदतों के लिए समय बचाने में मदद करते हैं। रीक्लेम डॉट AI जैसे टूल्स अपने-आप आपके कैलेंडर में वर्कआउट या किसी गहरे काम के लिए खास समय ब्लॉक कर देते हैं। यह बैठकों के हिसाब से भी खुद को एडजस्ट कर लेता है। यह प्राथमिकताओं को शेड्यूल में बदल कर निर्णय लेने की थकान को कम करता है। इसी तरह, टीमो ऐप विजुअल दिनचर्या सपोर्ट देकर इसे और बेहतर बनाता है।
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सेहत पर फोकस करने वाली आदतों के लिए मार्गदर्शन
सेहत से जुड़ी आदतों के लिए AI व्यक्तिगत स्वास्थ्य कोच की तरह काम करता है। यह आपकी प्रगति के डाटा के आधार पर आपकी जरूरत के हिसाब से खाने के प्लान और फिटनेस रूटीन तैयार करता है। हेल्थीफाई मी आपके लिए अपनी गति के हिसाब से सलाह को पर्सनलाइज करती है। हैबिटीफाई ऐप लगातार ट्रैक करने और स्ट्रिक ट्रेंड्स दिखाने की सुविधा देता है, जिससे डाटा के आधार पर आदतों में सुधार कर पाते हैं।
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AI को रोजमर्रा के कामों में शामिल करना
इन AI तकनीकों को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अच्छे से शामिल करने के लिए आप रीक्लेम डॉट AI या टीमों जैसे ऐप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं। इनकी मदद से अपनी 3 जरूरी आदतों- वर्कआउट करना, ध्यान लगाकर पढ़ाई और आराम करना तय करते हैं। इसके बाद, इमरजेंट या एटम्स जैसे ऐप्स को इसमें जोड़ें, ताकि आप अपने व्यवहार से जुड़ी जानकारी पा सकें। ये ऐप्स पैटर्न पहचानकर उन चीजों को पकड़ते हैं, जिनसे आपकी आदतें मजबूत होती हैं।