असम विधानसभा में UCC विधेयक पेश, गुजरात और उत्तराखंड के बाद तीसरा राज्य बनेगा
क्या है खबर?
असम में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार अपने वादे के अमल में जुट गई है। उसने सोमवार को राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण और अन्य एकसमान नियम लागू करना है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ओर से संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने विधानसभा में विधेयक पेश किया। सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में विधेयक को मंजूरी दे दी थी।
विधेयक
अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा कानून
असम में कानून से अनुसूचित जनजाति (पहाड़ी) और अनुसूचित जनजाति (मैदानी) को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। साथ ही, पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों, प्रथाओं और अनुष्ठानों को भी संहिता से बाहर रखा गया है। अगर राज्य में 'समान नागरिक संहिता, असम, 2026 विधेयक' लागू होता है तो यह उत्तराखंड और गुजरात के बाद इस मुद्दे पर कानून बनाने वाला देश का तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने 2024 में यह कानून सबसे पहले लागू किया था।
कानून
कानून में 4 बदलावों पर जोर
UCC विधेयक का उद्देश्य विवाह, लिव-इन रिलेशनशिप, भरण-पोषण और उत्तराधिकार से संबंधित कानूनों का एक समान सेट स्थापित करना है। इसमें 4 विषय विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर प्रतिबंध, पैतृक संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित मामले शामिल है। कानून राज्य के सभी निवासियों के लिए एक समान कानूनी ढांचा सुनिश्चित करता है।
प्रावधान
विधेयक में क्या है?
विधेयक में विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष निर्धारित है। बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसमें पति-पत्नी के भरण-पोषण, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रावधान है। विधेयक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पंजीकरण अनिवार्य करता है और ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चे के अधिकारों को औपचारिक मान्यता देता है। विधेयक में संपत्ति के समान वितरण और उत्तराधिकार मामले पर स्पष्टता है।