'नक्सलवाद मुक्त भारत' पर बहस में अमित शाह बोले- जो हथियार उठाएगा वह कीमत चुकाएगा
क्या है खबर?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में 'नक्सलवाद मुक्त भारत' पर हुई चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ सफल अभियान का पूरा खाका पेश करते हुए कहा कि कांग्रेस के समय आदिवासियों का विकास नहीं हुआ था। पहले देश के 12 राज्य नक्सलवाद से प्रभावित थे और अब यह लगभग समाप्त हो गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो हथियार उठाएगा, वह इसकी कीमत चुकाएगा। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कुछ कहा।
दावा
बस्तर में पूरी तरह समाप्त हुआ नक्सलवाद- शाह
शाह ने कहा, "आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। बस्तर के लोग इसलिए पिछड़ गए थे क्योंकि इस क्षेत्र पर 'लाल आतंक' का साया मंडरा रहा था। इसी वजह से विकास उन तक नहीं पहुंच पाया। आज वह साया हट गया है और बस्तर अब विकास के पथ पर अग्रसर है।" इस दौरान उन्होंने नक्सलवाद के कारण अपनी जान गंवाने वाले देश के वीर सुरक्षाकर्मियों समेत अन्य सभी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
चेतावनी
"जो हथियार उठाएगा वो इसकी कीमत चुकाएगा"
शाह ने चेतावनी देते हुए कहा, "देश में न्यायपालिका हैं, जिला पंचायत हैं। आप क्या इस तरह हथियार हाथ में उठा लोगे। ये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार है, जो हथियार उठाएगा वो इसकी कीमत चुकाएगा।" उन्होंने कांग्रेस की इंदिरा गांधी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, "नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं है। यह एक विचारधारा है, जिसे 1970 के बाद स्वीकार कर लिया गया था। दरअसल, देश में वामपंथी विचारधारा के कारण ही नक्सलवाद फैला है।"
समाधान
मोदी सरकार में हुआ कई समस्याओं का समाधान- शाह
शाह ने कहा, "2014 में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में कई सारी बरसों पुरानी समस्या का समाधान हुआ। धारा-370, 35A हटा, राम मंदिर बना और CAA का कानून बना।" उन्होंने आगे कहा, "कई सारे बड़े कारण जो आजादी के वक्त से देश की जनता चाहती थी, वो सारे काम प्रधानमंत्री मोदी के 12 साल के शासनकाल में हुए हैं। अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी प्रधानमंत्री मोदी के ही शासन में हुई है।"
सोच
नक्सलवाद केवल अपनी विचारधारा थोपने का नाम- शाह
शाह ने भारतीय लोकतंत्र और नक्सली सोच के बीच का अंतर समझाते हुए कहा, "जब हम आजाद हुए, हमने 'सत्यमेव जयते' को अपना आदर्श माना, लेकिन नक्सलियों का मूल वाक्य 'सत्ता बंदूक की नली से निकलती है' रहा है।" उन्होंने आरोप लगाया कि नक्सलवाद केवल अपनी विचारधारा को थोपने और मासूम लोगों को बरगलाकर सत्ता हासिल करने का एक हिंसक माध्यम है। संविधान में अन्याय से निपटने के प्रावधान हैं, लेकिन हथियार उठाना समाधान नहीं है।
आदर्श
"बिरसा मुंडा को नहीं चुना अपना आदर्श"
शाह ने कहा, "जो आदिवासी बिरसा मुंडा को अपना नायक मानता था, वह अचानक माओ का अनुयायी कैसे बन गया?" उन्होंने कहा, "वामपंथियों ने बस्तर और रेड कॉरिडोर को विकास की कमी के कारण नहीं, बल्कि कठिन भूगोल (जंगल) के कारण चुना ताकि वे वहां छिप सकें। बिहार के सहरसा और उत्तर प्रदेश के बलिया में भी 1960 के दौर में बस्तर जैसी स्थिति थी, लेकिन वहां उग्रवाद नहीं पनपा क्योंकि वहां छिपने के लिए जंगल नहीं थे।"
आरोप
शाह ने वामपंथियों पर लगाया आरोप
शाह ने कहा कि वामपंथियों ने जानबूझकर स्कूल और बैंक जलाए ताकि आदिवासी शिक्षित न हो सकें और उनकी विचारधारा के गुलाम बने रहें। उन्होंने कहा वामपंथी विचारधारा ने केवल रक्तपात और अन्याय फैलाया है। उन्होंने अपनी विचारधारा को बढ़ाने के लिए भोले आदिवासियों को चुना। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने किस कानून के तहत निर्दोष ग्रामीणों को मुखबिर बताकर फांसी पर लटकाया? भारत में न्याय केवल संविधान द्वारा रचित अदालतों में ही होगा, किसी खूनी कबीलाई अदालत में नहीं।
गुस्सा
विपक्ष के टोकने पर गुस्सा हुए शाह
नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान जब विपक्षी दलों ने शाह को टोकने की कोशिश की तो उन्होंने कड़े तेवर दिखाते हुए कहा, "मुझे उकसाओ मत, मैं आज तय करके आया हूं और पूरी बात बताकर ही जाऊंगा।" उन्होंने कहा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) का उद्भव विदेशी धरती से प्रेरित है। 1921 में चीन में कम्युनिस्ट पार्टी बनी और ठीक उसी समय भारत में भी इसका गठन हुआ। उस समय रूस की सरकार ने इस पार्टी को स्पॉन्सर किया था।
अभियान
भारत में कैसे चला नक्सलवाद के खिलाफ अभियान?
शाह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले इलाकों (जैसे अबूझमाड़) में सुरक्षा बलों के 406 नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) और रात में ऑपरेशन और घायल जवानों को तुरंत निकालने के लिए 68 अत्याधुनिक हेलीपैड बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 400 नए बुलेटप्रूफ वाहन तैनात करने के साथ घायल सुरक्षाकर्मियों के त्वरित और बेहतर इलाज मुहैया कराने के लिए 5 विशेष अस्पताल भी बनाए गए हैं।
कार्रवाई
देश किस तरह से हुई नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई?
शाह ने बताया कि देश में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियानों में अब तक 706 नक्सली मारे जा चुके हैं। इसी तरह सुरक्षा बलों ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए 2,218 नक्सलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत सरकार ने पुनर्वास नीति भी चलाई है। इससे प्रभावित होकर अब तक 4,839 नक्सलियों ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।