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ज्यादातर लोग खुद के बजाय दूसरों को कैसे दे लेते हैं बेहतर सलाह?
दूसरों को सलाह देने वालों का खुद उनपर अमल न करना

ज्यादातर लोग खुद के बजाय दूसरों को कैसे दे लेते हैं बेहतर सलाह?

लेखन सयाली
Aug 16, 2026
06:26 pm

क्या है खबर?

कई बार हम दूसरों को ऐसी सलाह देते हैं, जिसे खुद मानने में हिचकिचाते हैं। ऐसा क्यों होता है? क्या हम जानबूझकर ऐसा करते हैं या फिर यह स्वाभाविक है? इस लेख में हम इसी उलझन को सुलझाने की कोशिश करेंगे। हम जानेंगे कि क्यों हम दूसरों को सलाह देते समय खुद पर उतना ध्यान नहीं देते और कैसे हम इस स्थिति को सुधार सकते हैं। हम यह भी समझेंगे कि सलाह देने और लेने में क्या फर्क है।

#1

आत्मविश्वास की कमी

कई बार हम दूसरों को सलाह देते समय आत्मविश्वास से भरे होते हैं, लेकिन जब खुद पर अमल करने की बारी आती है तो हम संकोच करने लगते हैं।

इसका मुख्य कारण यह हो सकता है कि हमें अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा नहीं होता या फिर हमें डर लगता है कि हमारी सलाह गलत साबित हो सकती है।

इसलिए, जरूरी है कि हम खुद पर विश्वास रखें और अपनी सलाहों को अमल में अपनाने की कोशिश करें।

#2

डर और असफलता का भय

खुद पर सलाह अमल करने से पहले हमें असफलता का डर सताता है। हम सोचते हैं कि अगर हमारी सलाह गलत हो गई तो क्या होगा?

यह डर हमें आगे बढ़ने से रोकता है और हम अपनी सलाहों पर अमल करने में हिचकिचाते हैं। हालांकि, यह याद रखना चाहिए कि हर गलती से कुछ नया सीखने का मौका मिलता है और असफलता भी सफलता का हिस्सा होती है।

इसलिए, डर को मात देकर आगे बढ़ना चाहिए।

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#3

जिम्मेदारी का बोझ

दूसरों को सलाह देते समय हम जिम्मेदारी लेने को तैयार रहते हैं, लेकिन खुद पर अमल करते समय हमें यह बोझ उठाना मुश्किल लगता है। हमें डर रहता है कि अगर कुछ गलत हुआ तो लोग हमारी आलोचना करेंगे या हमारी सलाह पर सवाल उठाएंगे।

इसलिए, जरूरी है कि हम अपनी सलाहों पर विश्वास रखें और जिम्मेदारी उठाने से न कतराएं। इसके अलावा हमें अपने निर्णयों पर भरोसा रखना चाहिए और आलोचना को सकारात्मक रूप में लेना चाहिए।

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#4

सामाजिक दबाव

कभी-कभी समाज का दबाव भी हमारे फैसलों को प्रभावित करता है। हम चाहते हैं कि लोग हमारी बात मानें, इसलिए हम दूसरों को सलाह देते समय ज्यादा सोच-विचार नहीं करते।

वहीं, खुद पर अमल करते समय हमें डर रहता है कि लोग क्या कहेंगे या सोचेंगे। इसलिए, जरूरी है कि हम समाज के दबावों से ऊपर उठकर अपने फैसले खुद लेना शुरू करें और दूसरों की अपेक्षाओं पर ध्यान न दें।

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