जयपुर में क्यों घोषित किया हाई अलर्ट? इंटरनेट बंदी के साथ 3,000 पुलिसकर्मी भी तैनात
क्या है खबर?
राजस्थान की राजधानी जयपुर सोमवार को पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। जिला प्रशासन ने न केवल 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंदी की, बल्कि सुरक्षा के लिए 3,000 से अधिक पुलिसकर्मी भी तैनात किए हैं। दरअसल, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) द्वारा शहर के जगतपुरा इलाके में अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू किया गया है। इसमें कुछ धार्मिक स्थलों पर भी बुलडोजर चलाया जाएगा। ऐसे में प्रशासन ने एहतियातन यह हाई अलर्ट घोषित किया है।
अतिक्रमण
क्या है अतिक्रमण हटाने का पूरा मामला?
अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई नंदपुरी रोड पर लंबे समय से लंबित सड़क चौड़ीकरण परियोजना का हिस्सा है, जहां अधिकारी रेलवे लाइन के समानांतर चलने वाले डेढ किलोमीटर के खंड को उसकी वर्तमान चौड़ाई लगभग 25-30 फीट से बढ़ाकर स्वीकृत चौड़ाई 80 फीट तक करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन ने अफवाहों और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित की है।
मुद्दा
अतिक्रमण में आ रही हैं 5 धार्मिक संरचनाएं
इस अतिक्रमण हटाओ अभियान में सड़क की निर्धारित सीमा के भीतर आने वाली 5 धार्मिक संरचनाओं को हटाना भी शामिल है, जिनमें एक मस्जिद, 2 मंदिर, एक सत्संग हॉल और एक मजार शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि ये संरचनाएं वर्षों से चौड़ीकरण परियोजना में बाधा डाल रही थीं और इसके लिए नोटिस पहले ही जारी कर दिए थे। इसी तरह मालिकों को कार्रवाई से पहले स्वेच्छा से निर्माण हटाने का समय भी दिया गया था।
सुरक्षा
पूरे जयपुर में सुरक्षा के लिए 3,000 जवान तैनात
अधिकारियों ने किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए 24 घंटे की इंटरनेट बंदी के साथ व्यापक सुरक्षा इंतजाम भी किए हैं। राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी (RAC) की 12 कंपनियों सहित 3,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को पूरे शहर में तैनात किया गया है। जयपुर, कोटा और भरतपुर रेंजों से भी अतिरिक्त बल बुलाए गए हैं, जबकि शहर के संवेदनशील क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने ऑनलाइन झूठी सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
लाभ
इस परियोजना से 50 कॉलोनियों को होगा लाभ
प्रशासन ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण से जगतपुरा और मालवीय नगर, प्रधान मार्ग और एपेक्स सर्कल जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बीच संपर्क में सुधार होगा, साथ ही हरे कृष्णा मार्ग पर यातायात का दबाव भी कम होगा। अधिकारियों का अनुमान है कि परियोजना पूरी होने के बाद लगभग 50 कॉलोनियों को इससे लाभ होगा। निवासियों को सलाह दी गई है कि वे दिन भर विध्वंस स्थल के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था और संभावित आवागमन प्रतिबंधों का पालन करें।
आलोचना
राजनीतिक और सामुदायिक संगठनों ने की अभियान की आलोचना
इस अभियान की कुछ राजनीतिक नेताओं और सामुदायिक समूहों ने आलोचना भी की है। कांग्रेस विधायक रफीक खान ने इस प्रक्रिया की तात्कालिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूजा स्थलों से जुड़े मामलों को परामर्श और आम सहमति के माध्यम से निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे इस प्रक्रिया के दौरान सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का ध्यान रखें। मस्जिद और दरगाह को अनुचित रूप से निशाना बनाया जाना गलत है।