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बदलेंगे शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव वाले नियम? सरकार ने कोर्ट में कहा- पुनर्विचार कर रहे 
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो UGC नियमों पर फिर से विचार कर रही है

बदलेंगे शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव वाले नियम? सरकार ने कोर्ट में कहा- पुनर्विचार कर रहे 

लेखन आबिद खान
Aug 20, 2026
07:08 pm

क्या है खबर?

देश के शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए UGC के नए नियम फिर चर्चा में हैं। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि वह UGC के इक्विटी नियमों, 2026 पर दोबारा विचार कर रही है। ये नियम फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण लागू नहीं हैं। सरकार के जवाब के बाद कोर्ट ने मामले की सुनवाई 4 हफ्ते के लिए टाल दी है।

सरकार

सॉलिसिटर जनरल बोले- फिर से विचार कर रहे

केंद्र और UGC की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इन नियमों पर फिर से विचार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि इसके बाद फैसला किस दिशा में जाएगा।

उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि जब तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सुनवाई टाल दी जाए।

मामले पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की पीठ सुनवाई कर रही थी।

कोर्ट

कोर्ट ने हलफनामा दायर करने का दिया आदेश

कोर्ट ने कहा कि UGC को सभी याचिकाकर्ताओं की ओर से उठाए गए मुद्दों को शामिल करते हुए जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा।

इसके बाद UGC हलफनामे की प्रतियां सभी याचिकाकर्ताओं को देगा। फिर याचिकाकर्ता अपना जवाब दाखिल कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें 2 हफ्ते का समय मिलेगा।

पीठ में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने सरकार की बात स्वीकार करते हुए सुनवाई 4 सप्ताह के लिए स्थगित कर दी.

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याचिकाएं

किन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है कोर्ट?

कोर्ट शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए UGC की ओर से बनाए गए नियमों को दी गई चुनौती से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नियम का 3(C) मनमाना और भेदभावपूर्ण है और इससे कुछ वर्गों को उच्च शिक्षा से बाहर किया जा सकता है।

याचिका में कहा गया है कि यह समानता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों और UGC अधिनियम, 1956 के खिलाफ है।

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नियम

क्या हैं UGC के विवादित नियम?

जनवरी, 2026 में UGC ने प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्ट्यूशन रेगुलेशंस 2026 नामक नियम जारी किए थे। इसके तहत, सभी शिक्षण संस्थानों में समानता अवसर केंद्र बनाने होंगे, जिनमें SC, ST और OBC छात्र, कर्मचारी और शिक्षक जातिगत आधार पर हो रहे भेदभाव की शिकायत कर सकते हैं। पहले नियमों में केवल SC, ST के छात्र ही शामिल थे।

इसके अलावा हेल्पलाइन, जांच की समयसीमा और समानता समिति जैसे कई और प्रावधान भी हैं।

UGC

नियम लाने के पीछे UGC का क्या तर्क है?

UGC का कहना है कि यह नियम उच्च शिक्षा में समान अवसर और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। बिना निगरानी व्यवस्था के पिछड़ी जातियों के खिलाफ भेदभाव रोकना मुश्किल है।

UGC यह भी कहता है कि नियम धीरे-धीरे लागू होंगे और उद्देश्य सिर्फ समान अवसर और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नए नियम शिक्षा प्रणाली में समानता और सुरक्षा बढ़ाने का प्रयास है। हालांकि, इस पक्ष के बाद भी सामान्य वर्ग अभी इसके विरोध में उतरा हुआ है।

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