सुप्रीम कोर्ट ने दिए हाथियों की DNA प्रोफाइलिंग और स्पेशल क्लीनिक के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कैद में रखे हाथियों की नियमित जांच के लिए विशेष क्लीनिक बनाने का निर्देश दिया है। इन हाथियों में वे शामिल हैं जो मंदिरों, सर्कस, निजी व्यक्तियों और वन विभागों के पास रहते हैं।
हाथियों की खराब सेहत और उन्हें गैर-कानूनी ढंग से कैद रखने की चिंताओं के बाद यह कदम उठाया गया है, जबकि वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत हाथियों को कैद में रखना मना है।
2,725 कैद हाथियों के DNA प्रोफाइलिंग का आदेश
न्यायालय ने सभी 2,725 कैद हाथियों की DNA प्रोफाइलिंग का भी आदेश दिया है। इसका मुख्य मकसद हाथियों के गैर-कानूनी व्यापार को रोकना है।
दरअसल, यह बात सामने आई है कि इनमें से कई हाथियों के स्रोत अज्ञात हैं या उन्हें सीधे जंगल से पकड़ा गया था। इन क्लीनिकों को कैद हाथियों को दिए गए इलाज का पूरा रिकॉर्ड भी रखना होगा। साथ ही, सरकार को निर्देश दिया गया है कि निजी तौर पर हाथी रखने वालों के लिए न्यूनतम मानक तय किए जाएं, ताकि हाथियों के कल्याण को अंततः वास्तविक ध्यान मिल सके।