सुप्रीम कोर्ट का फैसला- कार्यस्थल पर कड़ा बर्ताव आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कार्यस्थल पर किसी का कठोर बॉस होना या तीखी टिप्पणी करना भारतीय कानून के तहत 'आत्महत्या के लिए उकसाना' नहीं माना जाएगा।
यह फैसला विनोद शिवकुमार नाम के एक वरिष्ठ वन अधिकारी से जुड़ा है। उन पर 2021 में एक महिला सहकर्मी की दुखद आत्महत्या के बाद आरोप लगाए गए थे। न्यायाधीशों ने साफ कहा कि जब तक यह पक्का सबूत न मिले कि किसी ने जानबूझकर दूसरे को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया है, तब तक इसे उकसाना नहीं कहा जा सकता।
मृतक अधिकारी ने नोट्स में लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
दिवंगत अधिकारी ने कुछ नोट्स छोड़े थे, जिनमें उन्होंने विनोद शिवकुमार पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इन नोट्स में लिखा था कि शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से उनकी बेइज्जती की और उनका वेतन भी रोक दिया था।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया था कि गर्भावस्था के दौरान उनके साथ ठीक से व्यवहार नहीं किया गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट को इस बात का कोई सबूत नहीं मिला कि शिवकुमार का इरादा उन्हें नुकसान पहुंचाने का था या वे उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाना चाहते थे। यही वजह रही कि कोर्ट ने उन पर लगे सभी आरोप खारिज कर दिए।