चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कानून पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट, विभाजित फैसला वापस लेने की मांग
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर दिए अपने विभाजित फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई और जांच करके निर्णय लेने का आश्वासन दिया। CJI ने याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के अनुरोध पर कहा, "हम इसकी जांच करेंगे और निर्णय लेंगे।"
याचिका
याचिका में क्या मांग की गई है?
पिछले महीने केंद्र सरकार ने अनुरोध किया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं को उच्च पीठ के पास भेजना चाहिए।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने अलग-अलग राय व्यक्त की और मामले को CJI के पास विचार के लिए भेज दिया।
इसी याचिका में विभाजित फैसले को वापस लेने और उसे उच्च पीठ के पास भेजने की मांग है।
मामला
क्या है मामला?
दिसंबर 2023 को संसद से कानून पारित किया गया कि CEC-EC की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक समिति की सलाह पर होगी, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष और केंद्रीय कैबिनेट का एक मंत्री शामिल होगा।
कानून बनने तक सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि जब तक समिति नहीं बनती, तब तक चुनाव आयोग में नियुक्तियां प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और CJI की समिति करेगी।
कानून बनने पर समिति में सरकार का बहुमत हो गया, जिसे चुनौती दी गई है।