दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था भारत, फिर क्यों विदेशी मान्यता का मोह?
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल का कहना है कि भारत को अपनी औपनिवेशिक मानसिकता को छोड़ना होगा और विदेशी मान्यता के पीछे भागना बंद करना चाहिए। उन्होंने यह बात 2026 के स्वतंत्रता दिवस पर कही। सान्याल ने बताया कि आज भारत खरीद के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। हालांकि, अभी भी कुछ महत्वपूर्ण काम बाकी हैं, जैसे हर व्यक्ति की औसत आमदनी (प्रति व्यक्ति आय) बढ़ाना और लोगों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा का इंतजाम करना।
सान्याल ने आत्मनिर्भरता और भाषाओं के आधुनिकीकरण का आग्रह किया
सान्याल ने इस बात पर जोर दिया कि आज भी शिक्षा जगत और हमारी अपनी भारतीय भाषाओं पर औपनिवेशिक सोच का प्रभाव दिखता है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हम विदेशी जर्नल को अपने स्थानीय शोध से ज्यादा महत्व देते हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्रों पर बहुत ज्यादा निर्भर रहते हैं। उन्होंने देश को आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाओं को बदलते समय के साथ खुद को ढालना होगा और उनमें नई रचनात्मकता लानी होगी। भविष्य की बात करें तो, वे काफी आशावान हैं। उन्हें पूरा विश्वास है कि अगले दो दशकों में भारत को दुनिया में उसका सही मुकाम जरूर मिलेगा।