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विवाहित पुरुष का सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना नहीं है अपराध- इलाहबाद हाई कोर्ट
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर अहम फैसला सुनाया है

विवाहित पुरुष का सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना नहीं है अपराध- इलाहबाद हाई कोर्ट

Mar 27, 2026
02:42 pm

क्या है खबर?

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के एक दंपति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि एक विवाहित पुरुष पर एक वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। पुरुष का सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहना किसी भी तरह से अपराध नहीं है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल के लिए निर्धारित की है।

प्रकरण

क्या है पूरा मामला?

कोर्ट ने अनामिका और नेत्रपाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। दरअसल, 8 जनवरी, 2026 को अनामिका की मां कांति ने शाहजहांपुर के जैतीपुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि नेत्रपाल उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर ले गया और धर्मपाल नामक अन्य व्यक्ति ने उसकी मदद की। इस पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 87 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

याचिका

अनामिका और नेत्रपाल ने याचिका दायर कर की सुरक्षा की मांग

पुलिस के मामला दर्ज करने के बाद 18 वर्षीय अनामिका और नेत्रपाल ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर कर FIR को रद्द करने और सुरक्षा दिलाने की मांग की थी। इस पर जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि एक विवाहित पुरुष पर एक वयस्क महिला के साथ सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। यह पूरी तरह से नागरिक अधिकार का मामला है।

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स्पष्ट

कोर्ट ने नैतिकता और अधिकारों को किया स्पष्ट

कोर्ट ने नैतिकता और कानून के पृथक्करण पर जोर देते हुए कहा कि कानून की दृष्टि से नेत्रपाल ने कोई अपराध नहीं किया। नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए की जाने वाली उसकी कार्रवाई सामाजिक राय या नैतिकता से निर्देशित नहीं हो सकती। इस दौरान कोर्ट ने पुलिस को याचिकाकर्ता दंपति को गिरफ्तार न करने के आदेश देते हुए अनामिका के परिवार के सभी सदस्यों को दंपति को किसी भी प्रकार का नुकसान न पहुंचाने के लिए पाबंद किया।

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सुरक्षा

कोर्ट ने दंपति की सुरक्षा के लिए पुलिस को ठहराया जिम्मेदार

कोर्ट ने कहा कि परिवार के सदस्य दंपति के वैवाहिक घर में प्रवेश नहीं कर सकते और न ही उनसे सीधे, इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से या किसी तीसरे पक्ष के जरिए संपर्क करने का प्रयास कर सकते हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि पुलिस का यह कर्तव्य है कि वह साथ रहने वाले इन दो सहमति प्राप्त वयस्कों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

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