लखनऊ की आग में फंसे युवक की पिता को अंतिम कॉल, कहा- पापा मुझे बचा लो
क्या है खबर?
लखनऊ के अलीगंज में जिस 3 मंजिला अवैध व्यावसायिक इमारत में आग लगी, उसमें फंसे 15 लोग अपनी आंखों के सामने मौत को देख रहे थे। आलमबाग में रहने वाले प्रभुज्योत सिंह के 24 वर्षीय बेटे सुखमनी एनिमेशन सेंटर में पिछले 4 साल से काम कर रहे थे। सोमवार को दोपहर 2 बजे जब इमारत में आग लगी तो प्रभुज्योत अपने कार्यालय में थे। तभी उनके पास बेटे सुखमनी का फोन आया था।
आवाज
अंतिम कॉल, उसके बाद दिखी लाश
प्रभुज्योत का कहना है कि सुखमनी ने उनसे सिर्फ इतना कहा, "पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो, मैं अंदर फंस गया हूं।" यह सुनकर सिंह तुरंत घटनास्थल भागे, लेकिन तब तक इमारत बुरी तरह जल चुकी थी। उन्होंने बताया कि बेटे का फोन आने पर उन्होंने पुलिस और दमकल को फोन किया था। उनकी मां किरण कौर की आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे। उनके बड़े भाई सायबान सिंह मोर्चरी में सुखमनी का शव तलाश रहे थे।
कॉल
शाजान जान बचाने के लिए बाथरूम में घुसे, लेकिन निकल न सके
सुखमनी की तरह 19 वर्षीय मोहम्मद शाजान ने भी घटना के बाद अपने पिता हाजी इकबाल को फोन किया था और बचाने की गुहार लगाई थी। बाराबंकी के रहने वाले शाजान गुडंबा में रहकर एनिमेशन की ट्रेनिंग ले रहे थे। जब आग लगी तो उन्होंने फोन करके कहा था कि वह अंदर फंस गया है। जान बचाने के लिए बाथरूम में चला गया था, लेकिन फिर बाहर नहीं निकल सका।
परिवार
हादसे से टूट गई कई परिवारों की उम्मीदें
लखनऊ में अग्निकांड के बाद कई परिवारों की उम्मीद भी टूट गई है। सीतापुर के रहने वाले 25 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव अपने परिवार के बड़े बेटे थे। परिवार को उनसे उम्मीदें थीं। घर के अकेले कमाने वाले 22 वर्षीय अब्दुल रहमान ने 9 महीने पहले यहां आईटी टेक्नीशियन के तौर पर काम शुरू किया था। उनके पिता लकवाग्रस्त हैं और मां गृहणी हैं। उनका परिवार सदमे में है। इसी तरह, हरियाणा-सोनीपत से नौकरी करने आए भविष्य शर्मा इकलौती संतान थे।