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लखनऊ अग्निकांड: रिहायशी इमारत को बना दिया व्यावसायिक, आपातकालीन रास्ता न होने से फंसे थे लोग
लखनऊ की 3 मंजिला में आग लगने के बाद पीछे के रास्ते से दीवार तोड़कर दाखिल हुए बचाव कर्मी

लखनऊ अग्निकांड: रिहायशी इमारत को बना दिया व्यावसायिक, आपातकालीन रास्ता न होने से फंसे थे लोग

लेखन गजेंद्र
Jun 23, 2026
09:47 am

क्या है खबर?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज में जिस 3 मंजिला इमारत में आग लगी है, उसको लेकर अब तरह-तरह की खामियां सामने आ रही हैं। इमारत लोगों के रहने के लिए बनाई गई थी और आवासीय इमारत में दर्ज है, लेकिन इसे चोरी-छिपे व्यावसायिक इमारत में बदल दिया गया और कोई अनुमति नहीं ली गई। इमारत में मानकों का उल्लंघन किया गया। आग से बचाव के कोई उपकरण और आपातकालीन मार्ग नहीं था, जिससे अंदर मौजूद लोग फंस गए।

हादसा

नगर निगम के रिकॉर्ड में आवासीय इमारत दर्ज

इमारत नगर निगम के हाउस टैक्स रिकॉर्ड में आवासीय इमारत के रूप में दर्ज है। इसे 2014 में आवासीय इमारत में बदल दिया गया। इसे आवासीय इमारत में बदलते समय कोई अनुमति नहीं ली गई। नगर निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण और बिजली विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से इमारत चलती रही। इसमें पेट शॉप और एनिमेशन सिखाने का कोचिंग सेंटर खोला गया। नियमों में खामी का फायदा उठाकर इमारत के मालिक ने अग्निशमन विभाग से कभी अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं लिया।

कार्रवाई

2016 में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बची इमारत

इंडिया टुडे के मुताबिक, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी में स्थित इमारत 1,992 वर्ग फुट पर बनी है। वर्ष 2014 में आवासीय इमारत की मंजूरी के बाद 2016 में प्राधिकरण ने स्थल पर अनधिकृत निर्माण का आरोप लगाते हुए एक मामला दायर किया था और मई, 2016 को विध्वंस का आदेश दिया था। हालांकि, मालिकों ने आपत्ति दर्ज कराई और बताया कि इमारत का निर्माण स्वीकृत योजना के अनुसार हुआ है। इसके बाद जुलाई 2016 में विध्वंस आदेश रोक दिया गया।

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लापरवाही

संपत्ति को 2 बार बेचा गया, फिर बनी व्यावसायिक इमारत

रिपोर्ट के मुताबिक, यह संपत्ति 1980 में लॉटरी के माध्यम से आवंटित की गई थी। 2005 में, संपत्ति को विक्रय विलेख के जरिए विजय कुमार और उषा को हस्तांतरित कर दिया गया था। फिर 2013 में, इसे वीरेंद्र प्रताप शुक्ला और सुरेंद्र प्रताप शुक्ला को बेच दिया गया और प्राधिकरण ने अगस्त, 2014 को संपत्ति नए मालिकों के नाम पर हस्तांतरित कर दी। इसके बाद इमारत को व्यावसायिक कामों के लिए उपयोग किया गया, लेकिन कोई अधिकारी नहीं बोला।

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जांच

आवासीय इमारत बताकर नियमों का किया उल्लंघन

आवासीय इमारत में अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र आवश्यक नहीं होता है, जबकि व्यावसायिक इमारत के लिए यह जरूरी है। यह इमारत आवासीय कागजों की वजह से बचती रही और कभी मानकों का पालन नहीं किया। न तो अग्निशमन विभाग से प्रमाणपत्र लिया और न ही इमारत में उपकरण लगवाए। इमारत में चढ़ने और उतरने के लिए सीढ़ी भी एक थी, जिसकी वजह से आग लगने पर लोग फंस गए और किसी वैकल्पिक रास्ते से भाग नहीं सके।

जांच

शासन ने SIT और प्राधिकरण ने भी जांच समिति बनाई

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर 4 अधिकारियों का निलंबन किया गया है, जिसमें एक बिजली विभाग, एक दमकल विभाग और 2 प्राधिकरण के इंजीनियर शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने 2 सदस्यीय विशेष जांच दल बनाया है, जबकि प्राधिकरण ने भी 5 सदस्यीय जांच टीम गठित की है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण के 15 इंजीनियरों पर गाज गिर सकती है। इनमें वे इंजीनियर भी शामिल हैं, जो 2016 से अलीगंज क्षेत्र में तैनात हैं।

हादसा

AC डक्ट में आग लगने से फैला धुआं

उषा मेहता मार्ग पर स्थित 3 मंजिला इमारत में सोमवार दोपहर 2 बजे आग लगी थी। आग एनिमेशन सेंटर में लगी, जिससे पूरी इमारत में फैल गई। अभी तक जानकारी मिली है कि सेंटर के एयर कंडीशनिंग (AC) डक्ट में लगी होगी, जिससे घना धुआं तेजी से इमारत में फैल गया। इमारत में मौजूद लोगों को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला और 15 लोगों की मौत हो गई। अधिकतर की मौत दम घुटने से हुई है।

ट्विटर पोस्ट

घटनास्थल पर मंगलवार को भी टीम मौजूद

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