कर्नाटक की AI सिटी पर ग्रहण, करोड़ों के मुआवजे के बावजूद किसान अड़े
बेंगलुरु के पास बनने वाली कर्नाटक की एक बड़ी AI आधारित इंटीग्रेटेड टाउनशिप, ग्रेटर बिदादी इंटीग्रेटेड टाउनशिप (GBIT), अब मुश्किलों में घिर गई है। एक ओर जहां यह प्रोजेक्ट बेंगलुरु में भीड़भाड़ कम करने और 5 से 6 लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियां देने का वादा करता है, वहीं दूसरी ओर 9 गांवों के किसान इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि इस जमीन अधिग्रहण से उनकी उपजाऊ कृषि भूमि और आने वाली पीढ़ियों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा।
राज्य प्रति एकड़ 2.07 करोड़ से 2.55 करोड़ रुपये मुआवजा दे रहा
यह टाउनशिप 7,431 एकड़ जमीन पर बनेगी, जिसमें घर, स्कूल, उद्योग और एक बड़ा AI हब शामिल होगा। इससे लगभग 6 लाख नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। हालांकि, लगभग 5,704 किसानों की जमीन अधिग्रहण से प्रभावित होगी, जिस कारण क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। राज्य सरकार ने प्रति एकड़ 2.07 करोड़ से 2.55 करोड़ रुपये और पुनर्वास लाभ देने की पेशकश की है, लेकिन किसानों का कहना है कि इतने मुआवजे से वे अपनी जिंदगी दोबारा नहीं संवार पाएंगे।
अब सरकार ने इस मामले को शांत करने और कानूनी चिंताओं को दूर करने के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, सरकार ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में किसी भी जमीन का अधिग्रहण जमीन मालिकों की सहमति के बिना नहीं किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से स्थिति शांत होगी और यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ पाएगा।