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भारत ने चीन के लिए व्यापार के सारे दरवाजे खोले? अमेरिका से बड़ा व्यापारिक साझेदार बना
चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना (फाइल तस्वीर)

भारत ने चीन के लिए व्यापार के सारे दरवाजे खोले? अमेरिका से बड़ा व्यापारिक साझेदार बना

लेखन गजेंद्र
Apr 08, 2026
07:45 pm

क्या है खबर?

चीन अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है। बीजिंग लगातार 11वें महीने में अपनी बढ़त को मजबूत बनाए हुए है। इसकी पुष्टि करते हुए भारत में चीनी राजदूत जू फिहोंग ने बताया कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच चीन अमेरिका को बहुत पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना है। ये बढ़ोतरी देशों के बीच व्यापारिक साझेदारी की मजबूती को बयां कर रही है।

व्यापार

अमेरिका से कितना आगे निकला चीन

चीनी राजदूत ने एक्स पर पिछले 11 महीने के आंकड़े देते हुए बताया कि अप्रैल से फरवरी के बीच अमेरिका ने भारत के साथ 127.8 बिलियन डॉलर (लगभग 11.82 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार किया है, जबकि चीन ने इसी दौरान 138 बिलियन डॉलर (करीब 12.80 लाख करोड़ रुपये) का कारोबार किया है। यह दिखाता है कि चीन भारत के साथ व्यापार के मामले में लगभग 10 बिलियन डॉलर की बढ़त बनाए हुए है।

व्यापार

चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़ा

चीन अपने इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री से दबदबा बनाए है, जिसका आयात ज्यादा है, जबकि भारत कच्चे माल का निर्यात करता है। ऐसे में उसका व्यापार घाटा बढ़ा है। वर्ष 2025 में भारत ने चीन को 19.75 बिलियन डॉलर (करीब 1.82 लाख करोड़ रुपये) का निर्यात किया, जबकि चीन ने भारत को 135.87 बिलियन डॉलर (12.5 लाख करोड़ रुपये) का निर्यात किया है। ऐसे में भारत का व्यापार घाटा 116.12 बिलियन डॉलर (10.68 लाख करोड़ रुपये) बढ़ा है।

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राहत

FDI में संशोधन से चीन को मिला फायदा, घाटा कम करने की उम्मीद

फोर्ब्स के मुताबिक, भारत ने अपना व्यापार घाटा कम करने के लिए 6 साल बाद प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नीति (FDI) में संशोधन किया है। संशोधन से चीन समेत भारत के पड़ोसी देशों की 10 प्रतिशत से कम हिस्सेदारी वाली कंपनियों को अब सरकारी मंजूरी की जरूरत नहीं। उनका निवेश स्वाचालित रूट से हो जाएगा, जैसे अन्य देश करते हैं। इससे भारत को व्यापार घाटे को कम करने, तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने और अधिक FDI आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

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 नियम

गलवान घाटी विवाद के बाद केंद्र ने सख्त किया था नियम

वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद और कोविड-19 को देखते हुए केंद्र ने सख्त नियम बनाया था। नियम के अनुसार, तब चीन समेत पड़ोसी देशों की कंपनी को भारत में निवेश से पहले सरकार की मंजूरी की जरूरत लेनी पड़ती थी, ताकि भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहणों को रोका जा सके। इस नियम के कारण चीन का निवेश लगभग रुक गया। अब नियम संशोधन से चीनी निवेश के दरवाजे खुल गए हैं।

निर्यात

चीन निर्यात के मामले में आगे

चीन भारत को इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्यात करता है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा टेलीफोन, कंप्यूटर, इंटीग्रेटेड सर्किट्स का है। इसके बाद मशीनरी, न्यूक्लियर रिएक्टर्स, बॉयलर्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक, आर्टिफिशियल रेजिन्स, आयरन-स्टील के सामान, खाद, लिथियम-आयन बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स शामिल है। चीन से इनका निर्यात भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है, लेकिन इससे व्यापार घाटा भी बढ़ता है। भारत चीन को आयरन ओर, रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद, समुद्री उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, मसाले, कास्टर ऑयल, टेलीकॉम उपकरण, कॉपर उत्पाद भेजता है।

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