गोविंदा के मैनेजर का सुनीता से सवाल- केस वापस ही लेना था तो तमाशा क्यों बनाया?
क्या है खबर?
अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा हाल ही में अपने बेटे यशवर्धन और वकील के साथ फैमिली कोर्ट के बाहर नजर आईं, जिससे उनके तलाक को लेकर अटकलें तेज हो गईं। हालांकि, गोविंदा के मैनेजर शशि सिन्हा ने पुष्टि की कि सुनीता ने तलाक की अर्जी वापस ले ली है। इसके साथ ही मैनेजर ने ये सवाल भी उठाया कि जब फैसला अर्जी वापस लेने का ही था तो कोर्ट जाकर बेवजह तमाशा बनाने की आखिर क्या जरूरत थी?
सवाल
"तलाक का फैसला वापस लेना अच्छी बात, पर बात इतनी क्यों बढ़ी?"
NDTV को दिए एक हालिया इंटरव्यू में गोविंदा के मैनेजर ने कहा कि हालांकि सुनीता द्वारा तलाक की अर्जी वापस लेने का फैसला एक बेहद खुशी की बात है, लेकिन उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि आखिर इस मामले को इतना बढ़ने ही क्यों दिया गया। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ से 2 साल तक पति-पत्नी के बीच का विवाद मीडिया में छाया रहा, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को बेवजह काफी नुकसान पहुंचा।
बखेड़ा
सुनीता के फैसले पर गोविंदा के मैनेजर ने उठाए सवाल
मैनेजर ने कहा, "रिश्तों में अनबन होना आम बात है, लेकिन जब कोई विवाद अदालत तक पहुंच जाता है तो वो जगजाहिर हो जाता है। ये ऐसी चीज है, जिसे इस मामले में टाला जा सकता था।'
उन्होंने सुनीता द्वारा तलाक की अर्जी दाखिल करने और बाद में उसे वापस लेने पर भी सवाल उठाया और कहा, "जरूरत नहीं थी जाने की। घर की बातें घर में रहकर, बैठकर बातें करके सुलझाई जा सकती थीं, बहुत सी चीजें होती हैं।"
तमाशा
"बेवजह बना हमारा तमाशा"
मैनेजर शशि सिन्हा ने कहा, "आज वापस ही लेना था तो केस किया ही क्यों था? इस बात का मुझे बहुत दुख हुआ। फिर बेवजह हम लोगों का तमाशा क्यों बना? (लोगों को इस बारे में पता चलने की कोई जरूरत नहीं थी। घर के मामलों को आपस में बैठकर सुलझाया जा सकता था। अगर मामला वापस ही लेना था तो पहले दर्ज ही क्यों कराया? यही बात मुझे दुखी करती है कि हम सब जगहंसाई का पात्र क्यों बने।"
प्रतिक्रिया
सुनीता के तलाक केस वापस लेने पर गोविंदा की पहली प्रतिक्रिया
बातचीत में मैनेजर ने आगे कहा कि इस पूरे घटनाक्रम पर गोविंदा की कोई प्रतिक्रिया नहीं थी।
उन्होंने बस यही कहा, "भगवान सबको सद्बुद्धि दें और सब लोग अक्ल से काम लें। बस यही सबसे बेहतर है। परिवार के अंदर की उलझनों और गलतफहमियों को एक साथ बैठकर बातचीत से सुलझाया जा सकता है। परेशानियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, लेकिन उन्हें आपस में सुलझाना बिल्कुल असंभव नहीं होता है।"