क्या जियो का IPO तोड़ देगा सारे रिकॉर्ड? इन बड़े भारतीय IPO से समझिए मुकाबला
क्या है खबर?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि कंपनी ने अपने प्रस्तावित IPO के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ जियो देश के अब तक के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम की दौड़ में शामिल हो गई है। बाजार के मौजूदा अनुमानों के मुताबिक, कंपनी इस इश्यू के जरिए करीब 37,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है।
रिकॉर्ड
जुटाई गई रकम के मामले में बना सकता है नया रिकॉर्ड
अगर जियो अनुमान के मुताबिक करीब 37,000 करोड़ रुपये जुटाने में सफल रहती है, तो यह भारत के अब तक के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती है। फिलहाल यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने 2024 में 27,859 करोड़ रुपये जुटाए थे। बाजार के कुछ अनुमानों में जियो के इश्यू का आकार 3 अरब डॉलर के करीब भी बताया गया है। ऐसे में भी कंपनी देश के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल रहेगी।
टक्कर
इन बड़े IPO से होगी सीधी टक्कर
जियो का संभावित IPO भारत के कई बड़े सार्वजनिक निर्गमों को पीछे छोड़ सकता है। हुंडई मोटर इंडिया के अलावा LIC ने 20,557 करोड़ रुपये, पेटीएम की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस ने 18,300 करोड़ रुपये और टाटा कैपिटल ने 15,512 करोड़ रुपये जुटाए थे। वहीं, कोल इंडिया का 2010 का सार्वजनिक निर्गम 15,199 करोड़ रुपये का रहा था। जियो का इश्यू इन सभी बड़े नामों के साथ सीधे तुलना में देखा जा रहा है।
तैयारी
टेलीकॉम से आगे बढ़कर टेक कंपनी बनने की तैयारी
जियो अब खुद को सिर्फ एक टेलीकॉम कंपनी तक सीमित नहीं रखना चाहती। कंपनी ब्रॉडबैंड, क्लाउड कंप्यूटिंग, एंटरप्राइज सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रही है। IPO के जरिए जुटाई गई राशि कंपनी की भविष्य की योजनाओं को गति देने में मदद कर सकती है। इस IPO के माध्यम से नए निवेशकों को भी जियो की डिजिटल और तकनीक आधारित विकास यात्रा में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
इश्यू
भारतीय पूंजी बाजार के लिए अहम हो सकता है यह इश्यू
जियो का IPO सिर्फ जुटाई जाने वाली रकम की वजह से महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी एक बड़ी घटना साबित हो सकता है। जियो ने 2016 में लॉन्च होने के बाद देश के टेलीकॉम और डिजिटल क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया है। रिलायंस का मानना है कि यह लिस्टिंग दिखाएगी कि भारत वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियां तैयार कर सकता है।