चीन के नए निर्यात नियमों से भारत के उत्पादन पर क्यों बढ़ी चिंता?
क्या है खबर?
चीन के नए निर्यात नियमों ने भारत की उत्पादन योजनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारत पिछले कुछ सालों में तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ा रहा है। देश का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2015 में 8.6 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 47 अरब डॉलर (लगभग 4,500 अरब रुपये) तक पहुंच गया। सरकार को उम्मीद है कि 2026 के आखिर तक यह 120 अरब डॉलर (लगभग 11,400 अरब रुपये) हो सकता है, लेकिन नए नियम से यह कठिन होगा।
नियम
क्या हैं चीन के नए निर्यात नियम?
चीन ने नए नियम लागू किए हैं, जिनमें जरूरी मशीनरी, रेयर अर्थ एलिमेंट, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और एडवांस तकनीक से जुड़े कई सामान के निर्यात पर सख्ती बढ़ाई गई है। इसका मतलब है कि अब दूसरे देशों तक ऐसे सामान भेजने में पहले से ज्यादा मंजूरी और समय लग सकता है। इंडस्ट्री से जुड़े लोग मान रहे हैं कि इससे सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। खासकर उन सेक्टरों में जहां चीन की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा बनी हुई है।
चिंता
भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय?
भारत के कई बड़े सेक्टर अब भी चीन पर निर्भर हैं। ऑटो सेक्टर में ही वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान करीब 26 प्रतिशत कंपोनेंट चीन से आए थे। स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी कई जरूरी मशीनें और पार्ट वहीं से आते हैं। ऐसे में अगर सप्लाई रुकती है, तो फैक्ट्री का काम धीमा हो सकता है। इससे नई परियोजनाओं में देरी, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और बाजार में सामान पहुंचने की रफ्तार पर असर पड़ सकता है।
तैयारी
सरकार ने बढ़ाई तैयारी
केंद्र सरकार ने इस चुनौती को देखते हुए तैयारी तेज कर दी है। सरकार 33,660 करोड़ रुपये की भारत औद्योगिक विकास योजना के तहत अगले तीन साल में 50 नए इंडस्ट्रियल पार्क शुरू करने की तैयारी में है। इसके साथ अलग-अलग सेक्टर के लिए नई योजनाएं भी बनाई जा रही हैं। सरकार का मकसद यही है कि भारत धीरे-धीरे जरूरी सामान खुद तैयार करे और दूसरे देशों पर निर्भरता कम कर सके।
मौका
चुनौती के बीच भारत के पास बड़ा मौका
चुनौती के बीच भारत के सामने बड़ा मौका भी है। कई वैश्विक कंपनियां चीन के बाहर नए उत्पादन केंद्र तलाश रही हैं। देश में एक्टिव LED डिस्प्ले बाजार ही करीब 2,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है और इसमें हर साल 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में अगर भारत तेजी से स्थानीय उत्पादन बढ़ाता है, तो आने वाले समय में वह दुनिया के बड़े उत्पादन केंद्रों में मजबूत जगह बना सकता है।