जेपी ग्रुप मामले को लेकर अडाणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वेदांता
क्या है खबर?
जेपी ग्रुप के एसेट्स को लेकर वेदांता और अडाणी ग्रुप के बीच विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, वेदांता ने अदालत में अर्जी देकर अडाणी के रेजोल्यूशन प्लान पर रोक लगाने की मांग की है। इससे पहले राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) ने मांग को खारिज कर दिया था। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से आगे की स्थिति साफ हो सकती है।
विवाद
क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद दिवालिया हो चुके जेपी ग्रुप के एसेट्स को लेकर है, जिस पर करीब 57,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इन एसेट्स के लिए अडाणी ग्रुप (14,535 करोड़ रुपये) और वेदांता (17,000 करोड़ रुपये) दोनों ने ही बोली लगाई थी। क्रेडिटर्स की कमेटी ने अडाणी के प्लान को मंजूरी दी, क्योंकि उसमें ज्यादा पैसा पहले देने का प्रस्ताव था। वहीं वेदांता का दावा है कि उसकी बोली की कुल वैल्यू ज्यादा थी, लेकिन फिर भी उसे नजरअंदाज किया गया।
सवाल
बोली और फैसले पर उठे सवाल
अडाणी ग्रुप ने 14,535 करोड़ रुपये की बोली लगाई, जिसमें करीब 6,000 करोड़ रुपये तुरंत और बाकी रकम 2-3 साल में देने की बात थी। दूसरी ओर वेदांता ग्रुप ने कुल रकम ज्यादा की पेशकश की थी, लेकिन भुगतान की अवधि 6 साल थी। बाद में वेदांता ने अपनी बोली में बदलाव भी किया। कंपनी का कहना है कि क्रेडिटर्स ने सही फैसला नहीं लिया और ज्यादा वैल्यू वाले प्लान को नजरअंदाज किया, जिससे उसे नुकसान हुआ है।
अनुमान
आगे क्या हो सकता है?
वेदांता पहले NCLT और फिर NCLAT में यह मामला उठा चुकी है, लेकिन दोनों ही जगह उसे राहत नहीं मिली है। अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद आगे का रास्ता तय होगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि IBC नियमों के तहत क्रेडिटर्स का फैसला अहम माना जाता है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है और किसे राहत मिलती है।