टाटा संस को जल्द ही लाना पड़ सकता है IPO, जानिए क्या है इसकी वजह
क्या है खबर?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शैडो लेंडर्स की परिभाषा को अपडेट किया है। इस बदलाव का टाटा संस पर बड़ा असर पड़ सकता है। नए नियम के अनुसार, सहयोगी कंपनियों और समूह की संस्थाओं से धन लेने वाले शैडो लेंडर्स को सार्वजनिक धन तक अप्रत्यक्ष पहुंच रखने वाला माना जाएगा। इसका मतलब यह हो सकता है कि टाटा संस को नियामक के नए नियमों का पालन करने के लिए प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाना पड़ सकता है।
समयावधि
कब लागू होगा यह बदलाव?
RBI की ओर से यह बदलाव 1 जुलाई से लागू होगा, जिससे पहले टाटा संस को IPO लाने पर विचार करना पड़ सकता है। इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमणियन ने बताया कि टाटा समूह की 7 कंपनियों की टाटा संस में कुल मिलाकर लगभग 12 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि इन कंपनियों द्वारा जुटाया गया लोन टाटा संस के लिए सार्वजनिक धन तक अप्रत्यक्ष पहुंच का काम करता है।
अनदेखी
पहले ही लाना था कंपनी को IPO
टाटा संस को सितंबर, 2025 तक सार्वजनिक होना था, लेकिन वह समय सीमा चूक गई। कंपनी को ऊपरी स्तर की श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि इसे स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध होना अनिवार्य है। 2024 में कंपनी ने RBI के समक्ष 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' के रूप में अपना पंजीकरण स्वैच्छिक रूप से छोड़ने के लिए आवेदन किया था। निजी रहने से टाटा ट्रस्ट्स को बेहतर नियंत्रण मिलता है।
असर
सार्वजनिक होने से कंपनी पर क्या पड़ेगा असर?
सार्वजनिक सूचीबद्ध होने का मतलब होगा कड़ी निगरानी, अल्पसंख्यक शेयरधारकों का ध्यान रखना और समूह के भीतर होने वाले लेन-देन पर प्रतिबंध। पिछले महीने टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पल्लोनजी समूह के अध्यक्ष शापूरजी पल्लोनजी मिस्त्री ने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की सार्वजनिक लिस्टिंग की अपनी मांग दोहराई। उन्होंने RBI से आग्रह किया कि निवेशकों के लिए मूल्य बढ़ाने के लिए ऐसा कदम उठाना आवश्यक है।