AI के कारण उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों के लिए भारत बना स्थिर ठिकाना
निवेशक एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों पर केंद्रित दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में पैसा लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ, भारत एक संतुलित और शांत ठिकाना बनकर उभर रहा है। जून के मध्य से भारतीय शेयरों में 3.6 अरब डॉलर (करीब 350 अरब रुपये) की विदेशी पूंजी आई है।
इसकी मुख्य वजह फंड्स से निकासी में कमी और घरेलू सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) से लगातार हो रहा निवेश है।
नतीजा यह है कि बाजार ने 6 फीसदी की मजबूत बढ़त दर्ज की है, जबकि दूसरे बाजार AI की हवा में उड़ रहे हैं।
करीब 2,400 अरब रुपये का निवेश आने की उम्मीद
भारत इसलिए अपनी अलग पहचान बना रहा है क्योंकि यहां का बाजार AI पर आधारित क्षेत्रों के बड़े उतार-चढ़ाव के मुकाबले काफी स्थिर नजर आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर, वैश्विक फंड भारत को लेकर अपने पोर्टफोलियो को सिर्फ 'न्यूट्रल' स्थिति में ले आते हैं, तो यहां 25 अरब डॉलर (करीब 2,400 अरब रुपये) का अतिरिक्त निवेश आ सकता है।
इसके अलावा, भारत की अर्थव्यवस्था में भी असली ताकत दिखाई दे रही है। क्रेडिट ग्रोथ में 18.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजे देने वाली लगभग 73 फीसदी कंपनियों ने या तो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया है या उससे बेहतर और स्थानीय निवेश भी फिर से रफ्तार पकड़ रहे हैं।
युवा निवेशकों या वैश्विक रुझानों पर नजर रखने वालों के लिए भारत में दिख रही स्थिरता और विकास की संभावनाओं को अब नजरअंदाज करना मुश्किल है।