सरकार की गोबरधन योजना से गैस आयात के बचेंगे करीब 450 अरब रुपये
भारत की गोबरधन योजना जैविक कचरे जैसे गोबर और फसल के बचे हुए अवशेषों को बायोगैस में बदलने पर काम कर रही है।
माना जा रहा है कि इस पहल से देश को गैस आयात पर लगभग 5 अरब डॉलर (करीब 450 अरब रुपये) की बचत हो सकती है।
फिलहाल, भारत अपनी आधी से ज्यादा प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है, जिस पर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.2 अरब डॉलर (करीब 1,400 अरब रुपये) का भारी भरकम खर्च आया था।
यह कदम ऊर्जा बिल को काफी कम करेगा और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता भी घटाएगा।
योजना के तहत लगेंगे 1,500 बायोगैस प्लांट
इस योजना में देश भर में 1,500 पूरी तरह से काम करने वाले बायोगैस प्लांट लगाने का लक्ष्य रखा गया है। ये प्लांट सिर्फ ईंधन ही नहीं तैयार करेंगे, बल्कि पर्यावरण के लिए अच्छी खाद भी बनाएंगे।
इससे रासायनिक खाद के आयात पर भी करीब एक अरब डॉलर (करीब 90 अरब रुपये) की बचत हो सकती है। आर्थिक लाभों के साथ-साथ इस योजना का मकसद ग्रामीण रोजगार बढ़ाना, खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाना और फसल के कचरे को जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को घटाना भी है।
दिल्ली NCR जैसे इलाकों के लिए यह एक बड़ी समस्या है। भारतीय बायोगैस संघ ने इस पहल का समर्थन किया है।