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बजट 2026 से क्रिप्टोकरेंसी बाजार को बड़ी उम्मीदें, क्या चाहते हैं निवेशक?
बजट 2026 से क्रिप्टोकरेंसी बाजार को बड़ी उम्मीदें

बजट 2026 से क्रिप्टोकरेंसी बाजार को बड़ी उम्मीदें, क्या चाहते हैं निवेशक?

Jan 28, 2026
10:26 pm

क्या है खबर?

बजट 2026 से दूसरे क्षेत्रों के साथ-साथ क्रिप्टोकरेंसी बाजार को भी काफी उम्मीदें हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि इस बार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भी कुछ बातें साफ हो सकती हैं। बिटकॉइन और एथेरियम ने अच्छा मुनाफा दिया है, लेकिन नियम साफ न होने से आम निवेशक अभी भी डर और भ्रम में हैं और फैसले लेने से बच रहे हैं।

चलन

भारत में तेजी से बढ़ता क्रिप्टो का चलन

भारत में क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। UPI और डिजिटल पेमेंट के कारण लोगों के लिए ऑनलाइन लेनदेन आसान हुआ है। युवा वर्ग क्रिप्टो को कमाई के नए साधन के रूप में देख रहा है। बीते एक साल में क्रिप्टो लेनदेन में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, इस्तेमाल बढ़ने के साथ यह मांग भी तेज हुई है कि सरकार इसके लिए साफ और सरल नियम बनाए ताकि जोखिम कम हो सके।

सख्ती

क्रिप्टो टैक्स पर सख्ती पहले से जारी

भारत सरकार ने 2022 के बजट में क्रिप्टो पर टैक्स लागू किया था। क्रिप्टो से कमाई पर 30 प्रतिशत टैक्स और हर लेनदेन पर 1 प्रतिशत TDS लिया जाता है। नुकसान को दूसरी कमाई से घटाने की अनुमति नहीं है। बजट 2025 में नियम और सख्त हुए और जानकारी देना जरूरी कर दिया गया। अब हर क्रिप्टो लेनदेन टैक्स विभाग तक पहुंच रहा है, जिससे निगरानी और नियंत्रण काफी बढ़ गया है।

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टैक्स

नहीं बताए गए क्रिप्टो पर भारी टैक्स

अब अगर किसी ने अपनी क्रिप्टो होल्डिंग नहीं बताई और जांच में वह पकड़ी गई, तो उस पर भारी टैक्स लगेगा। बजट 2025 के बाद ऐसे मामलों में करीब 60 प्रतिशत तक टैक्स और जुर्माना लग सकता है। इसका मतलब है कि किसी के भी लिए क्रिप्टो छुपाना अब बहुत महंगा सौदा हो गया है। सरकार साफ करना चाहती है कि सभी निवेशक नियमों का पालन करें और पारदर्शिता बनाए रखें।

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उम्मीदें

बजट 2026 से क्या उम्मीदें हैं?

अब सबकी नजर बजट 2026 पर है। निवेशक चाहते हैं कि क्रिप्टो टैक्स और नियमों को आसान और साफ किया जाए। लोग चाहते हैं कि कम से कम यह बताया जाए कि नुकसान का क्या होगा और टैक्स कैसे गिना जाएगा। बड़ी टैक्स छूट की उम्मीद कम है, लेकिन अगर नियम साफ होते हैं तो आम निवेशकों का भरोसा जरूर बढ़ सकता है और बाजार में स्थिरता आ सकती है।

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