बजट 2026: फूड डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए रेस्तारां मालिकों को क्या है उम्मीद?
क्या है खबर?
फूड डिलीवरी सिस्टम को रेस्तरां स्तर पर लगातार दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण उद्योग का टैक्स बदलावों और बढ़ते परिचालन खर्चों से मार्जिन कम हो रहा है। रेस्तरां मालिक सरकार से टैक्स और पट्टे से संबंधित शुल्क में छूट चाहते हैं, जिससे वे ऑनलाइन मांग को पूरा करते हुए डिलीवरी कमीशन और छूट-आधारित वृद्धि को वहन कर सकें। आइये जानते हैं आगामी केंद्रीय बजट में इन समस्याओं को देखते हुए क्या उम्मीदे हैं।
लागत बढ़ी
इस कारण हुई रेस्तराओं की लागत में वृद्धि
नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) ढांचे में हुए बदलावों से रेस्तरांओं की निश्चित लागत में वृद्धि हुई है। इनमें से कई फूड डिलीवरी को अपने मुख्य राजस्व स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं। NRAI के अध्यक्ष सागर दरयानी ने कहा कि सरकार वाणिज्यिक पट्टों के लिए GST के तहत रिवर्स चार्ज तंत्र पर अधिसूचना संख्या 09/2024 की समीक्षा करे, क्योंकि इससे छोटे रेस्तरां के लिए लागत बढ़ गई है।
परेशानी
रेस्तरां संचालकों पर बढ़ रहा दबाव
रेस्तरां संचालकों का कहना है कि टैक्स संबंधी दबाव बढ़ते किराए, सामग्री की कीमतों, ऊर्जा लागत और नियामक अनुपालन खर्चों से उत्पन्न मौजूदा चुनौतियों को और बढ़ा रहे हैं। इससे लाभप्रदता को प्रभावित किए बिना प्लेटफॉर्म शुल्क को वहन करने या छूट को बनाए रखने के लिए सीमित गुंजाइश बची है। एपिटोम के CEO जिगर संघवी ने कहा कि बजट संरचनात्मक चुनौतियों का समाधान करने का अवसर प्रदान करेगा, जो डिलीवरी अर्थव्यवस्था को तेजी से प्रभावित कर रही हैं।
मांग
उद्योग का दर्जा देने की मांग
NRAI भारत से सेवा निर्यात योजना (SEIS) की बहाली, आवश्यक इनपुट पर सब्सिडी, ऋण वित्तपोषण तक बेहतर पहुंच और इस क्षेत्र में विकास, स्थिरता और रोजगार को समर्थन देने के लिए औपचारिक उद्योग का दर्जा देने की मांग कर रहा है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म एटर्नल (जोमैटो) के मुख्य वित्तीय अधिकारी अक्षंत गोयल ने डिलीवरी शुल्क पर अब 18 प्रतिशत GST लागू है, जिसका बोझ उपभोक्ताओं पर डाल दिया गया है, जिससे व्यवसाय की वृद्धि पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
मंत्रालय गठन
मंत्रालय गठन की मांग दोहराई
तत्काल टैक्स राहत के अलावा, NRAI ने उद्योग का दर्जा और एक समर्पित खाद्य सेवा मंत्रालय के गठन की अपनी लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराया है। उनका तर्क है कि इस क्षेत्र का विशाल आकार, रोजगार की सघनता और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के साथ इसका घनिष्ठ संबंध, केंद्रित नीति निर्माण को अनिवार्य बनाते हैं। GST में राहत, फाइनेंस और नियामक स्पष्टता रेस्तरां पर लागत के दबाव को कम कर सकती है।