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व्हील बैलेंसिंग को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानिए नुकसान
व्हील बैलेंसिंग को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

व्हील बैलेंसिंग को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, जानिए नुकसान

Jun 12, 2026
09:49 am

क्या है खबर?

कार या बाइक को सुरक्षित और आरामदायक तरीके से चलाने के लिए व्हील बैलेंसिंग बहुत जरूरी होती है। कई लोग टायर बदलने के बाद या लंबे समय तक गाड़ी चलाने के बावजूद इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन समय पर व्हील बैलेंसिंग नहीं कराने से गाड़ी की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है। पहियों का संतुलन बिगड़ने पर ड्राइविंग का अनुभव खराब होने लगता है और कई दूसरी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

समस्या

स्टीयरिंग में कंपन की बढ़ सकती है समस्या

व्हील बैलेंसिंग खराब होने का सबसे आम असर स्टीयरिंग पर दिखाई देता है। गाड़ी की रफ्तार बढ़ने पर स्टीयरिंग में कंपन महसूस होने लगता है, जिससे ड्राइविंग असहज हो जाती है। लंबे समय तक यह समस्या बनी रहने पर ड्राइवर जल्दी थक सकता है और वाहन पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। खासकर हाईवे पर तेज गति से चलते समय यह समस्या सुरक्षा के लिहाज से जोखिम पैदा कर सकती है।

#2

जल्दी घिसने लगते हैं टायर

अगर पहियों का संतुलन सही नहीं है तो टायर सड़क पर बराबर दबाव नहीं बना पाते। इसकी वजह से टायर कुछ जगहों से ज्यादा और कुछ जगहों से कम घिसते हैं। इससे टायर की उम्र कम हो जाती है और उसे समय से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित व्हील बैलेंसिंग कराने से टायर समान रूप से घिसते हैं और उनकी लाइफ बेहतर बनी रहती है।

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#3

सस्पेंशन और माइलेज पर भी पड़ता है असर

व्हील बैलेंसिंग नहीं कराने का असर केवल टायर तक सीमित नहीं रहता है। लगातार कंपन की वजह से सस्पेंशन, व्हील बेयरिंग और अन्य हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है। साथ ही गाड़ी को चलाने में अधिक मेहनत लगने के कारण ईंधन की खपत भी बढ़ सकती है। इसलिए वाहन विशेषज्ञ समय-समय पर व्हील बैलेंसिंग की जांच कराने की सलाह देते हैं, ताकि गाड़ी बेहतर स्थिति में बनी रहे।

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