फ्रांस, इटली, बेल्जियम और पुर्तगाल; क्यों सुलग रहे हैं यूरोप के कई देश?
क्या है खबर?
शनिवार को यूरोप के कई देशों में हिंसक प्रदर्शन हुए। बढ़ती जीवन लागत, महंगाई, सार्वजनिक सेवाओं में गिरावट और सरकार की कथित विफलताओं के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। फ्रांस और अल्बानिया में तो प्रदर्शन हिंसक हो गए। अकेले फ्रांस में ही 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतर गए और जमकर उत्पात मचाया। यहां 1,200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आइए समझते हैं यूरोपीय देशों में जनता सड़कों पर क्यों है।
फ्रांस
फ्रांस में बदहाल स्कूल और महंगाई के विरोध में प्रदर्शन
फ्रांस में मुख्य तौर पर 2 वजहों से प्रदर्शनों हो रहे हैं। एक तरफ बढ़ती महंगाई और ईंधन के दामों को लेकर जनता में आक्रोश है। दूसरी तरफ छात्र और शिक्षक स्कूल की बदहाल स्थिति और शिक्षा बजट में कटौती का विरोध कर रहे हैं।
फ्रांस में बीते करीब एक महीने से स्कूलों की बदहाल स्थिति को लेकर प्रदर्शन जारी हैं।
इस दौरान कई जगहों पर हिंसक झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक इमारतों को आग के हवाले कर दिया।
बेल्जियम
बेल्जियम में भी शिक्षा सुधारों को लेकर सड़कों पर जनता
बेल्जियम में भी सैकड़ों लोग, जिनमें ज्यादातर युवा प्रदर्शनकारी थे, ब्रुसेल्स की सड़कों पर उतर आए।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ झड़प भी हुई।
छात्र समूहों का कहना है कि वे शिक्षा की बढ़ती लागत और उन सुधारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिनसे उन्हें डर है कि उच्च शिक्षा कम सुलभ हो जाएगी।
यहां के प्रदर्शन आंशिक रूप से फ्रांस के प्रदर्शनों से प्रेरित माने जा रहे हैं।
पुर्तगाल
पुर्तगाल में भी महंगाई से जूझ रही जनता
पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में हजारों लोगों ने बढ़ती महंगाई, कम वेतन और किफायती आवास पाने में कठिनाई के विरोध में प्रदर्शन किया।
लिस्बन और कई अन्य शहरों में 2017 के मुकाबले संपत्तियों की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है। साथ ही किराए में भी लगभग इतनी ही बढ़ोतरी हुई है।
इससे युवा कामगारों और कम आय वाले परिवारों पर दबाव बढ़ गया है। इसी वजह से लोग सड़कों पर हैं।
इटली
क्या हैं इटली के प्रदर्शनकारियों की मांगें?
इटली में स्थिर वेतन, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने में आ रही दिक्कतों को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किए।
मिलान में मार्च के दौरान हिंसक झड़प हुई, जिसके चलते पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।
बोलोनिया शहर में भी प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
यहां अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
अल्बानिया
अल्बानिया में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग
अल्बानिया में भी छात्र विश्वविद्यालयों की बदतर स्थिति, शिक्षा खर्च और रोजगार के मौकों की कमी को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। यहां प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट, बैंक और डाकघर सहित कई इमारतों में आग लगा दी और पुलिस पर ईंटें और पत्थर फेंके।
अल्बानिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि शनिवार को 35 लोग घायल हुए, जिनमें 18 पुलिसकर्मी और 17 प्रदर्शनकारी शामिल हैं।