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अमेरिका और ईरान हमले रोकने को सहमत, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत के लिए कतर में मिलेंगे
अमेरिका और ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत के लिए कतर में मिलेंगे (फाइल तस्वीर)

अमेरिका और ईरान हमले रोकने को सहमत, होर्मुज जलडमरूमध्य पर बातचीत के लिए कतर में मिलेंगे

लेखन गजेंद्र
Jun 29, 2026
08:51 am

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान पिछले दिनों के सैन्य टकराव के बाद एक बार फिर हमले रोकने को सहमत हो गए हैं। अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से यह दावा किया। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करना बंद करने पर सहमत हो गए हैं, क्योंकि दोनों होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने विवाद को सुलझाने के लिए मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में मिलने की योजना बना रहे हैं।

टकराव

परमाणु कार्यक्रम से होर्मुज पर आया बातचीत का मुद्दा

रिपोर्ट के मुताबिक, दोहा में मंगलवार को होने वाली वार्ता मूल रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए स्विट्जरलैंड में निर्धारित की गई थी। लेकिन अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ने के कारण वार्ता का स्थान बदल दिया गया है। साथ ही, अब इस मुलाकात में बातचीत का मुख्य बिंदु भी बदल दिया गया है। ये परमाणु कार्यक्रम की जगह होर्मुज जलडमरूमध्य होगा। अमेरिकी तकनीकी टीम के प्रमुख निक स्टीवर्ट वार्ता में भाग ले सकते हैं।

बातचीत

अमेरिका और ईरान में फिर क्यों शुरू हुआ टकराव?

युद्धविराम को अभी मुश्किल से 11 दिन हुए हैं और दोनों पक्षों ने नए सिरे से हमले शुरू कर दिए हैं। दरअसल, युद्ध समाप्त करने के लिए जो समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है, उस पर अलग-अलग बयानों, खासतौर से होर्मुज जलडमरूमध्य पर इसकी शर्तों के कारण टकराव शुरू हुआ है। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी लगातार धमकी दे रहे हैं। अभी तक अमेरिकी सेना और ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच हॉटलाइन भी स्थापित नहीं हुई है।

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हमला

कैसे शुरू हुआ हमला?

युद्ध विराम के बाद ईरान चाहता है कि जहाज उसके बताए रूट से गुजरें और उस पर नियंत्रण चाहता है। अमेरिका ने इसे सीजफायर का साफ उल्लंघन बताया। इस बीच, 25 जून को सिंगापुर ध्वज वाला कार्गो शिप अलग मार्ग से गुजर रहा था, तभी ईरान ने उस पर हमला कर दिया। इसके बाद अमेरिका ने भी ईरान के सैन्य स्थल और अन्य जगह मिसाइल हमला किया। ईरान ने भी कुवैत और बहरीन में अमेरिकी अड्डों पर मिसाइल-ड्रोन हमले किए।

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