क्या है जापान का MMX मिशन? मंगल के चंद्रमा से धरती पर लाएगा मिट्टी के नमूने
क्या है खबर?
जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी पृथ्वी पर लाने के लिए एक खास अंतरिक्ष मिशन आज लॉन्च कर दिया है। इस अभियान के सफल होने पर जापान दुनिया का पहला ऐसा देश बन सकता है, जो मंगल के किसी चंद्रमा से नमूने इकट्ठा कर धरती पर लाएगा। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों के अध्ययन से मंगल और उसके चंद्रमाओं की उत्पत्ति से जुड़े कई अहम सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
मिशन
क्या है मिशन?
इस अभियान का नाम मार्स मून एक्सप्लोरेशन (MMX) रखा गया है। इस मिशन पर करीब 57.8 करोड़ डॉलर (लगभग 5,500 करोड़ रुपये) खर्च किए गए हैं।
लगभग 5 टन वजनी अंतरिक्ष यान को 20 अक्टूबर, 2026 को जापान के तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से H-3 रॉकेट की मदद से रवाना किया गया। लॉन्च के करीब 71 मिनट बाद यान रॉकेट से अलग हो गया।
योजना के मुताबिक, यह अगले साल अगस्त के आसपास मंगल ग्रह के क्षेत्र में पहुंच सकता है।
लक्ष्य
फोबोस की सतह से10 ग्राम नमूने जुटाने का लक्ष्य
मंगल ग्रह के 2 प्राकृतिक चंद्रमा हैं, जिनके नाम फोबोस और डीमोस हैं।
अंतरिक्ष यान फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी और दूसरे पदार्थ इकट्ठा करने की कोशिश करेगा। इस काम में फ्रांस और जर्मनी की मदद से तैयार किया गया एक रोवर भी शामिल होगा।
मिशन के दौरान डीमोस का भी अध्ययन किया जाएगा, लेकिन वहां उतरने की योजना नहीं है। वैज्ञानिक दोनों चंद्रमाओं की बनावट और उनकी उत्पत्ति से जुड़ी जानकारी जुटाना चाहते हैं।
उम्मीद
2031 में नमूनों के धरती पर पहुंचने की उम्मीद
मंगल के आसपास करीब 3 साल तक काम करने के बाद अंतरिक्ष यान को नमूनों के साथ पृथ्वी की ओर लौटना है।
मिशन की योजना के अनुसार, ये नमूने वर्ष 2031 में धरती पर पहुंच सकते हैं। इनके ऑस्ट्रेलिया के रेगिस्तानी इलाके में उतरने की संभावना है। इसके बाद वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में इनकी जांच करेंगे।
नमूनों में मौजूद खनिजों और दूसरे पदार्थों का अध्ययन करके यह पता लगाने की कोशिश होगी कि फोबोस का निर्माण कैसे हुआ।
जवाब
मंगल के दोनों चंद्रमा के निर्माण का मिलेगा जवाब
फोबोस और डीमोस की उत्पत्ति को लेकर वैज्ञानिकों के बीच अलग-अलग विचार हैं।
एक संभावना यह है कि मंगल ग्रह से किसी बड़े खगोलीय पिंड के टकराने के बाद निकले मलबे से इनका निर्माण हुआ। दूसरी धारणा के मुताबिक, ये दोनों चंद्रमा अंतरिक्ष में घूमने वाले क्षुद्रग्रह हो सकते हैं, जिन्हें मंगल ने अपने गुरुत्वाकर्षण के कारण अपनी कक्षा में खींच लिया।
फोबोस से मिलने वाले नमूनों की जांच शुरुआती इतिहास की जानकारी हासिल करने में मदद कर सकती है।
अन्य
अमेरिका और चीन भी मंगल से नमूने लाने की तैयारी
अब तक कोई भी देश मंगल ग्रह या उसके चंद्रमाओं से नमूने पृथ्वी पर नहीं ला पाया है।
अमेरिका और चीन भी इस दिशा में काम कर रहे हैं। चीन अपने तियानवेन-3 मिशन को वर्ष 2028 के आसपास भेजने की तैयारी कर रहा है और उससे भी 2031 तक नमूने लौटने की उम्मीद जताई गई है।
इससे पहले रूस ने 2011 में फोबोस-ग्रंट मिशन भेजा था, लेकिन वह पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल सका था।