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कौन हैं 'इंटरनेट के जनक' विंटन सर्फ, जो छोड़ रहे गूगल? 
गूगल से 20 साल बाद रिटायर होंगे विंटन सर्फ

कौन हैं 'इंटरनेट के जनक' विंटन सर्फ, जो छोड़ रहे गूगल? 

Jul 01, 2026
02:16 pm

क्या है खबर?

आधुनिक इंटरनेट की नींव रखने वाले और 'इंटरनेट के जनक' नाम से मशहूर विंटन सर्फ अब गूगल से रिटायर होने जा रहे हैं। 83 वर्षीय विंटन सर्फ वर्ष 2005 से गूगल में वाइस प्रेसिडेंट और चीफ इंटरनेट इवेंजेलिस्ट के पद पर काम कर रहे थे। उनके रिटायरमेंट की घोषणा एक तकनीकी सम्मेलन के दौरान की गई। इंटरनेट के विकास में उनके योगदान को दुनियाभर में अहम माना जाता है और तकनीकी जगत ने उनके लंबे करियर की सराहना की है।

वजह

इस वजह से कहा जाता है 'इंटरनेट का जनक'

विंटन और कंप्यूटर वैज्ञानिक रॉबर्ट कान ने 1970 के दशक में TCP/IP प्रोटोकॉल विकसित किया था। इसी तकनीक ने अलग-अलग कंप्यूटर नेटवर्क को आपस में जोड़ना संभव बनाया। आज पूरी दुनिया में इंटरनेट इसी आधार पर काम करता है। इसी ऐतिहासिक योगदान की वजह से विंटन सर्फ को 'इंटरनेट का जनक' कहा जाता है। उनके काम ने आधुनिक डिजिटल दुनिया की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पहचान

पढ़ाई और उपलब्धियों से बनाई अलग पहचान

विंटन ने कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया और कई बड़े संस्थानों के साथ जुड़कर नई तकनीकों के विकास में योगदान दिया। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कई मानद डिग्रियां और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले। वर्ष 2004 में उन्हें ACM ट्यूरिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इसके बाद 2005 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने उन्हें 'प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम' भी प्रदान किया।

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राय

AI को लेकर भी रखी अपनी राय

रिटायरमेंट की घोषणा के दौरान विंटन सर्फ ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के भविष्य पर भी अपने विचार साझा किए। उनका कहना है कि भविष्य में AI एजेंट्स के बीच बातचीत के लिए केवल अंग्रेजी भाषा सबसे बेहतर विकल्प नहीं होगी। उनके अनुसार, सामान्य भाषाओं में कई बार भ्रम की स्थिति बन सकती है। ऐसे में AI सिस्टम के बीच अधिक स्पष्ट, सटीक और भरोसेमंद तरीके से संवाद होना जरूरी होगा।

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योगदान

तकनीक की दुनिया में हमेशा याद रहेगा योगदान

विंटन का मानना है कि आने वाले समय में इंटरनेट और AI दोनों तेजी से विकसित होंगे, इसलिए इनके बीच होने वाला संवाद भी अधिक सटीक होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि जैसे कोई संदेश कई लोगों तक पहुंचते-पहुंचते बदल जाता है, वैसे ही AI में भी गलतफहमी से बचना जरूरी है। तकनीक की दुनिया में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

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