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पश्चिम बंगाल के पूर्व उपसभापति आशीष बनर्जी का शव TMC कार्यालय में फांसी से लटकता मिला
पश्चिम बंगाल के पूर्व उपसभापति आशीष बनर्जी का शव TMC कार्यालय में फांसी से लटकता मिला

पश्चिम बंगाल के पूर्व उपसभापति आशीष बनर्जी का शव TMC कार्यालय में फांसी से लटकता मिला

लेखन गजेंद्र
Aug 16, 2026
09:17 am

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में रविवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 5 बार के विधायक आशीष बनर्जी का शव मिलने से सनसनी फैल गई। बनर्जी का शव रामपुरहाट में उनके घर के पास स्थित TMC कार्यालय के अंदर फांसी के फंदे से लटका मिला था। शव के साथ एक सुसाइड नोट भी मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में राज्य विधानसभा में पूर्व उपसभापति रहे बनर्जी का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

निधन

कल पार्टी कार्यालय में फहराया था तिरंगा

बनर्जी का रामपुरहाट के वार्ड नंबर 5 के हट्टलपारा में रहते थे। उनके घर के बगल में ही पार्टी का कार्यालय है। शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने पार्टी कार्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।

रविवार को सुबह करीब 7 बजे उनका शव वहीं मिला। खबर फैलते ही भीड़ जमा हो गई। पुलिस और फॉरेंसिक टीम भी मौके पहुंची है।

बनर्जी ने यह कदम क्यों उठाया, इसकी अभी तक जानकारी नहीं मिली है।

चुनाव

इस बार हारे थे चुनाव

बनर्जी 2001 से 2026 तक रामपुरहाट से लगातार 5 बार विधायक रह चुके हैं। 2026 के चुनावों में वह भाजपा उम्मीदवार ध्रुव साहा से 24,000 से अधिक वोट से हारे थे।

बनर्जी को ममता के मंत्रिमंडल में कई बार जगह मिली। वह स्कूल शिक्षा मंत्री और कृषि मंत्री रह चुके हैं।

बता दें कि बंगाल में भाजपा सरकार आने के बाद अधिकतर TMC पार्षद, विधायक-सांसद भाजपा में जा चुके हैं या भ्रष्टाचार के आरोप में मुकदमा झेल रहे हैं।

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ट्विटर पोस्ट

मौके पर जमा भीड़

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नोट

सुसाइड नोट में बनर्जी ने क्या लिखा?

TMC नेता बनर्जी ने अपने सुसाइड नोट में दावा किया कि नागरिक नियोजन और विकास एजेंसी के निविदा संबंधी निर्णयों में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

उन्होंने लिखा, "तरापीठ रामपुरहाट विकास प्राधिकरण (TRDA) में मुझे साढ़े 3 साल तक कोई फाइल नहीं मिली। मैं निविदा समिति में नहीं था, न चेक पर हस्ताक्षर करने का अधिकार था। मैंने न योजनाओं को मंजूरी दी और न अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए। मामलों पर मुझसे न चर्चा हुई, न मेरी भूमिका थी।"

नोट

जीवन में कभी भ्रष्टाचार नहीं किया

बनर्जी ने नोट में लिखा, "मैंने अपने पूरे जीवन में कभी भी कोई काम करने के बदले एक पैसा भी नहीं लिया है।"

उन्होंने यह भी लिखा कि वह अपनी पार्टी के भीतर होने वाले "गलत कामों" को हमेशा स्वीकार नहीं कर सकते थे, लेकिन वह उनके खिलाफ विरोध करने में असमर्थ रहे थे।

बनर्जी ने राजनीति में आने को गलती बताते हुए आरोप लगाया कि उनको बदनाम करने और अपमानित करने के प्रयास किए गए थे।

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