अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला, कहा- 2029 में चौथी बार हारने को तैयार रहें
क्या है खबर?
देश में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक घमासान चल रहा है। इसमें कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन भी हमलावर है। इस बीच बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल पर बड़ा राजनीतिक हमला बोलते हुए उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों में हार के लिए तैयार रहने को कहा है।
बयान
शाह ने क्या दिया बयान?
शाह ने कांग्रेस के रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, "आप मीडिया इवेंट्स बनाकर और झूठ फैलाकर अब जनता का विश्वास हासिल नहीं कर सकते। मैं राहुल गांधी और उनके साथियों से कहना चाहता हूं कि वे एक बार फिर 2029 के आम चुनावों में करारी हार के लिए तैयार रहें। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) भारी बहुमत के साथ प्रचंड जीत दर्ज करने जा रहा है और कांग्रेस लगातार चौथी बार चुनाव हारने के लिए तैयार है।"
हवाला
शाह ने भाजपा की गुजरात में जीत का दिया हवाला
शाह की यह टिप्पणी गुजरात के गांधीनगर नगर निगम, ओखा और थारा की नगरपालिकाओं में भाजपा द्वारा 104 में से 90 सीटें जीतने के बाद आई है।
गांधीनगर में भाजपा ने 44 में से 38 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत हासिल की है।
शाह ने कहा भाजपा ने गांधीनगर में पिछले चुनाव की तुलना में 10 प्रतिशत वोट शेयर बढ़ाया है और कांग्रेस ने 1985 के बाद से गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीता है।
दावा
"कांग्रेस की पहुंच गांवों में नहीं"
शाह ने कहा कि राहुल गांधी दिल्ली में विपक्षी नेताओं और समर्थकों को विरोध प्रदर्शन के लिए लामबंद करके देश का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं कर सकते।
उन्होंने कहा, "देश की आवाज खेतों, खलिहानों, गांवों, दूरदराज की पहाड़ियों, जंगलों और यहां तक कि नदियों के किनारों पर भी है। आपकी पहुंच वहां तक नहीं है।"
उन्होंने कहा कि SIR पर चल रही व्यापक बहस के बीच राहुल घुसपैठियों को संरक्षण देने की कोशिश कर रहे हैं।
सलाह
कांग्रेस को आत्मनिरीक्षण की सलाह
शाह ने अंत में कहा कि कांग्रेस बार-बार मिलने वाली चुनावी शिकस्त के बाद अपनी कमियों को देखने के बजाय देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रियाओं पर सवाल उठा रही है।
राहुल पूरी तरह से देश के जमीनी और ग्रामीण मतदाताओं से कट चुके हैं, इसलिए दिल्ली में प्रदर्शन करने से जनता का समर्थन वापस नहीं मिलने वाला है। उन्हें अपने कार्य और नीतियों का आत्मनिरीक्षण करते हुए आगे बढ़ने की योजना बनानी होगी।