नार्कोलेप्सी से पीड़ित लोगों का दिमाग होता है काफी युवा, वैज्ञानिक खोजने में लगे हैं कारण
क्या है खबर?
नार्कोलेप्सी एक दीर्घकालिक और गंभीर तंत्रिका संबंधी नींद से जुड़ी बीमारी है, जो मस्तिष्क के सोने और जागने के चक्र को नियंत्रित करने की क्षमता को प्रभावित करती है। नार्कोलेप्सी से पीड़ित लोगों को अक्सर रात में नींद टूटने और दिन में बहुत ज्यादा नींद आने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि, अब एक अध्ययन से सामने आया है कि इससे पीड़ित लोगों का दिमाग काफी युवा होता है।
अध्ययन
यह बीमारी कम कर सकती है दिमाग की जैविक आयु
इस अध्ययन से सामने आया है कि नार्कोलेप्सी के मरीजों के दिमाग में आम तौर पर समय से पहले बूढ़े होने के लक्षण नहीं दिखते, जो आमतौर पर लंबे समय तक नींद में खलल पड़ने से जुड़े होते हैं।
नार्कोलेप्सी के 2 मुख्य प्रकार हैं, जिन्हें टाइप 1 और टाइप 2 के नाम से जाना जाता है। दोनों में ही दिन के समय बहुत ज्यादा नींद आती है, लेकिन टाइप 2 में लक्षण आमतौर पर कम गंभीर होते हैं।
टाइप 1
क्या कहता है अध्ययन?
नार्कोलेप्सी टाइप 1 में नींद और जागने की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी होती है। साथ ही हाइपोक्रेटिन की कमी हो जाती है।
हाइपोक्रेटिन एक न्यूरोपेप्टाइड है, जो शरीर की कई जरूरी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करता है। इनमें जागने और सतर्क रहने की क्षमता शामिल होती है, जिसका संबंध दिमाग में उम्र के साथ होने वाले बदलावों से भी होता है।
इसलिए, इससे समय से पहले दिमाग के बूढ़े होने की संभावना बढ़ने की उम्मीद की जाती है।
कारण
वैज्ञानिक नहीं खोज पाए हैं इसकी वजह
हालांकि, शोधकर्ता कहते हैं कि उपलब्ध बायोमार्कर और न्यूरोइमेजिंग के नतीजे इस संभावना का समर्थन नहीं करते। इसके बजाय इसका उल्टा असर देखने को मिलता है।
कुछ सबूत बताते हैं कि हाइपोक्रेटिन की कमी से यह प्रभाव बदल सकता है कि नींद की गड़बड़ी किसी व्यक्ति के दिमाग पर कैसे असर डालती है। वैज्ञानिक अभी तक यह जान नहीं पाए हैं कि नार्कोलेप्सी से पीड़ित लोगों का दिमाग जवान क्यों रहता है।
इस संबंध में और अध्ययन की जरूरत होगी।
इलाज
नार्कोलेप्सी के इलाज के तरीके
नार्कोलेप्सी एक लंबे समय तक रहने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसका कोई पक्का इलाज नहीं है। हालांकि, डॉक्टर की सलाह से दी गई दवाइयां, जीवनशैली की आदतों और व्यवहार से जुड़े तरीकों से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।
अगर आप हर दिन एक ही समय पर सोएं और जागें तो आपको फायदा हो सकता है। साथ ही अच्छा माहौल बनाने और हल्की एक्सरसाइज करने से भी लाभ होता है।