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ज्यादा वजन वाले डिमेंशिया रोगी रह सकते हैं ज्यादा समय तक जीवित, अध्ययन में हुआ खुलासा
ज्यादा वजन वाले डिमेंशिया रोगियों के लंबे जीवन की संभावना (तस्वीर: पिक्सेल)

ज्यादा वजन वाले डिमेंशिया रोगी रह सकते हैं ज्यादा समय तक जीवित, अध्ययन में हुआ खुलासा

लेखन सयाली
Oct 12, 2026
12:56 pm

क्या है खबर?

आम तौर पर डॉक्टर कहते हैं कि हमें अपना वजन कम रखना चाहिए, ताकि शरीर बीमारियों से बचा रह सके। हालांकि, अब एक अध्ययन में दावा किया गया है कि ज्यादा वजन होने से डिमेंशिया के रोगी लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। डिमेंशिया की वजह से याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और सामाजिक कौशल में धीरे-धीरे गिरावट आती है। आइए जानते हैं मोटापा इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए क्यों अच्छा है।

अध्ययन

अमेरिका और कनाडा में हुआ यह अध्ययन

इस अध्ययन को 'जर्नल ऑफ अल्जाइमर्स डिजीज' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया। इसे अमेरिका और कनाडा के शोधकर्ताओं ने पूरा किया, जिन्हें सबूत मिले हैं कि डिमेंशिया का पता चलने के बाद शरीर का ज्यादा वजन लंबी उम्र से जुड़ा होता है।

शोधकर्ताओं की टीम ने 51 साल और उससे ज्यादा उम्र के 4,523 अमेरिकी वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया, जिन्हें अध्ययन शुरू होने के समय डिमेंशिया नहीं था। हालांकि, बाद में उन्हें यह बीमारी हो गई।

प्रक्रिया

इस तरह किया गया अध्ययन

अध्ययन 20 साल तक चला था। शुरुआत में प्रतिभागियों के बॉडी मास इंडेक्स (BMI) के आधार पर उन्हें 4 समूह में बांटा गया, जिनमें सामान्य वजन, ज्यादा वजन, क्लास एक मोटापा और क्लास 2/3 मोटापा शामिल थे।

इसमें देखा गया कि सामान्य वजन वालों के जल्दी मरने की संभावना ज्यादा थी। इसका मतलब यह नहीं कि डिमेंशिया के मरीजों को मोटा होने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि यह अध्ययन इस सवाल की जांच करने के लिए नहीं किया गया था।

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नतीजे

पोषण भी रखता है महत्त्व

न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ की बिहेवियरल साइंटिस्ट वर्जीनिया चांग ने कहा, "अध्ययन से पता चलता है कि डिमेंशिया का पता चलने के समय, वजन की स्थिति जीवित रहने की संभावना का उपयोगी संकेत हो सकती है। नतीजे इस बात का समर्थन करते हैं कि डिमेंशिया से पीड़ित लोगों की सेहत और उनके जीवित रहने में पोषण एक अहम भूमिका निभाता है।"

सामान्य की तुलना में, ज्यादा वजन वाले समूह में मौत का जोखिम 16 प्रतिशत कम था।

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अन्य

क्या कहते हैं नतीजे?

क्लास 1 मोटापे वाले लोगों में मौत का जोखिम 27 प्रतिशत कम था और क्लास 2/3 वालों में यह 22 प्रतिशत कम था।

यह तब सामने आया जब मृत्यु दर पर असर डालने वाले अन्य अहम कारकों को भी ध्यान में रखा गया, जैसे कि लिंग, शिक्षा का स्तर, नस्ल व जातीयता, धूम्रपान की आदत और अन्य पुरानी बीमारियां।

अध्ययन में अभी यह सामने नहीं आया है कि इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं।

जानकारी

संभावित कारण का हुआ खुलासा

शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि डिमेंशिया की वजह से लोग खाना छोड़ सकते हैं या खाना ही भूल सकते हैं। हालांकि, जिन लोगों के शरीर में ज्यादा चर्बी या मांसपेशियां होती हैं, उनके लिए यह शायद उतनी बड़ी समस्या न हो।

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