सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ की कमी पर सरकार को दी चेतावनी, कहा- हम धरने पर बैठेंगे
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के पास उचित फुटपाथ और पैदल यात्री क्रॉसिंग न होने पर केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि अगली सुनवाई से पहले काम पूरा नहीं हुआ, तो न्यायाधीश स्वयं दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य द्वार पर धरने पर बैठ जाएंगे। जस्टिस जेबी परदीवाला और केवी विनोद चंद्रन की पीठ ने बुनियादी पैदल यात्री सुविधाओं की कमी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।
चेतावनी
कोर्ट ने सरकार को क्या दी चेतावनी?
कोर्ट ने कहा, "अगर अगली तारीख तक काम पूरा नहीं हुआ, तो हम दोनों हाई कोर्ट के मुख्य द्वार पर बैठ जाएंगे और काम पूरा होने तक घर नहीं जाएंगे। हम अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) विक्रमजीत बनर्जी को भी घर नहीं जाने देंगे।"
कोर्ट ने साफ किया कि वह इस मामले में अब किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से समन भेजा जाएगा।
अधिकार
"फुटपाथ का अधिकार जीवन के अधिकार का हिस्सा"
कोर्ट ने पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ की उपलब्धता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 19(1)(d) (देश में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार) के तहत एक मौलिक अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि सड़कों पर चलने वाले राहगीरों के अधिकार प्राथमिक हैं, और ये गाड़ियों की आवाजाही से ऊपर माने जाएंगे। फुटपाथ का निर्माण वैकल्पिक न होकर बुनियादी जरूरत है।
निर्देश
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पूरे देश के लिए व्यापक आदेश जारी किए हैं।
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सड़कों के किनारे से अवैध दुकानें, बिजली के खंभे, अवैध पार्किंग और कचरे जैसी बाधाओं को हटाकर फुटपाथ को साफ करने के निर्देश दिए हैं।
इसी तरह केंद्र सरकार को एक केंद्रीय समिति गठित करने का आदेश दिया है, जो देश भर में इस आदेश के पालन और फुटपाथों की स्थिति की निगरानी करेगी।