सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पूरी दिल्ली से बैरिकेड हटाए जाएं, इंटरनेट और मेट्रो चालू रखें
क्या है खबर?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान की गई पाबंदी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जाहिर की है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पूरी दिल्ली से बैरिकेड हटाए जाएं और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोगों को शहर में आजादी से घूमने-फिरने की अनुमति होनी चाहिए। मेट्रो और ट्रेनें बंद करने और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के खिलाफ ये याचिकाएं दायर की गई थीं, जिन पर आज विशेष सुनवाई हुई।
पुलिस
कोर्ट ने कहा- पुलिस के पास कानून व्यवस्था पर कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा, "कोर्ट को उस व्यक्ति से कोई मतलब नहीं होता जो इस मामले में शामिल है, चाहे वह पुलिस अधिकारी हो, वकील हो या आम नागरिक हो। कोर्ट कार्रवाई के पैमाने से जुड़ी चिंताओं को समझता है। जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कोर्ट का जवाब और चिंता भी उतनी ही संवेदनशील है। पुलिस अधिकारियों को राज्य की दलीलों के अलावा कानून और व्यवस्था बनाए रखने का कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं है।"
आपतकाल
वकील ने पूछा- क्या सरकार अघोषित आपातकाल लगा रही है?
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा, "मेट्रो रोककर, आप आने-जाने की काबिलियत छीन रहे हैं। इंटरनेट बंद है। 7,000 लोगों को हिरासत में लिया गया है। यह सही नहीं है। युवाओं ने कानूनन विरोध करने का फैसला किया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव प्रणाली सही नहीं है। संविधान अनुच्छेद 358 में कहता है कि आपातकाल लगने पर अनुच्छेद 19 के अधिकारों पर रोक लगाई जा सकती है। क्या सरकार कह रही है कि ये अघोषित आपातकाल है?"
सिब्बल का तर्क
कपिल सिब्बल बोले- आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन बंद किए गए
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा, "वे लोगों को ट्रेनों से उठा रहे हैं। 4 किलोमीटर का बैन है। इंटरनेट सस्पेंड कर दिया गया। आदेश के बावजूद 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए।"
एक अन्य वकील ने कहा, "कल मेरे साथ भी बुरा बर्ताव हुआ। कल हालात बहुत ज्यादा खराब थे। किसी को खड़े होने की भी इजाजत नहीं थी। यह नागरिकों के आंदोलन करने के अधिकार के बारे में है। कल हम पुलिसिया शासन से एक कदम दूर थे।"
नोटिस
कोर्ट ने पूछा- अवमानना की कार्यवाही क्यों शुरू नहीं की जाए?
कोर्ट ने मेट्रो स्टेशन बंद करने और लोगों को हिरासत में लेने के मामले में केंद्र और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
कोर्ट ने अधिकारियों से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों शुरू नहीं की जाए। साथ ही, पहले के आदेश के पालन की रिपोर्ट भी मांगी है। अधिकारियों को 13 अक्टूबर तक जवाब देना होगा।
कोर्ट ने बंद मेट्रो स्टेशनों का नक्शा भी मांगा है।
मामला
क्या है मामला?
दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मेट्रो और ट्रेनें पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा था कि केवल जितनी जरूरत हो उतने ही प्रतिबंध लगाए जाए।
याचिकाओं में कहा गया है कि कोर्ट के आदेश के बावजूद मेट्रो स्टेशन और सड़क परिवहन को बाधित किया गया।
इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और दिल्ली मेट्रो रेल निगम को प्रतिवादी बनाते हुए अवमानना याचिका दायर की गई।